गाजा पर रॉकेट से हमला, 20 लोग मारे गए

गाजा पर रॉकेट से हमला, 20 लोग मारे गए

हाल के दिनों में यरुशलम में हुए तनाव में गाजा पट्टी में आतंकियों ने खतरनाक मोड़ ले लिया और इसरायल ने ऑफिसरों के मुताबिक रॉकेट से हुए हमलों में कम से कम 20 लोगों को मार डाला है. विदेशी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने बोला कि मारे गए 20 लोगों में 9 बच्चे थे. इसके अतिरिक्त 65 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं. लेकिन प्रारम्भ में यह स्पष्ट नहीं था कि किन परिस्थितियों में लोगों की मृत्यु हुई.

आखिरी बार 2014 में आई थी रॉकेट की आवाज
इजरायली सेना ने ट्विटर पर लिखा कि उसने हवाई हमले में तीन हमास कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया और मार दिया. इजरायल ने येरुशलम के निकट ही बेतशेमेश के साथ-साथ बेत शेमेश की ओर से दागे गए रॉकेटों के एक बैराज के उत्तर में तटीय परिक्षेत्र पर हवाई हमले किए. सेना के प्रतिनिधि ने बोला कि अंतिम बार शहर में रॉकेट अलर्ट की आवाज 2014 में आई थी. इस बीच, इसरायल की सेना ने बोला कि गाजा पट्टी से सोमवार को इसरायल की ओर से आतंकी फिलिस्तीनी समूहों द्वारा 150 से अधिक रॉकेट दागे गए. दर्जनों इसरायल के आयरन डोम रक्षा प्रणाली द्वारा बाधित किए गए थे.

नेतन्याहू ने कहा, देंगे तगड़ा उत्तर
इसरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कसम खाई कि इसरायल 'बड़ी ताकत से उत्तर देगा. उन्होंने बोला कि आज शाम, यरूशलम दिवस पर, गाजा में आतंकी संगठनों ने एक लाल रेखा को पार किया है और यरूशलम के बाहरी इलाके में मिसाइलों से हमला किया है. हाल के दिनों में यहूदियों को टेम्पल माउंट और यहूदियों को नोबल सेंक्चुरी के नाम से जाने वाले इसराइली सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं.

दो दर्जन ऑफिसरों को चोटें आईं
फिलिस्तीनी बचावकर्मियों ने सोमवार को बोला कि 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जबकि इसरायली पुलिस का बोलना है कि दो दर्जन ऑफिसरों को चोट लगी थी. इस्लामवादी हमास आंदोलन ने सोमवार रात तक येरुशलम में शेख जर्राह के पड़ोस से और पवित्र जगह में बसने वालों और पुलिस को वापस लेने के लिए एक अल्टीमेटम जारी किया था. इसके खत्म होने के कुछ समय बाद, बड़े पैमाने पर रॉकेट हमलों की रिपोर्ट प्रारम्भ हुई.

कई फिलिस्तीनी संगठन हमलों में शामिल
हमास के एक प्रतिनिधि ने बोला कि रॉकेट इसरायल के लिए एक 'संदेश' और 'पवित्र शहर के विरूद्ध अपने अपराधों और आक्रामकता की प्रतिक्रिया' थे. गाजा में इस्लामिक जिहाद समूह ने भी जिम्मेदारी का दावा किया है. एक इसरायली सेना के प्रतिनिधि ने बोला कि कई फिलिस्तीनी संगठन हमलों में शामिल थे, लेकिन हमास को दोषी ठहराया गया है. उन्होंने बोला कि हमास को भारी नुकसान पहुंचाने का इरादा इसरायल का था. पश्चिम बैंक और यरुशलम के अरब बहुल पूर्वी हिस्से में स्थिति रमजान के उपवास महीने की शुरूआत से तनावपूर्ण रही है, जो इस हफ्ते के अंत में खत्म होने वाले हैं.


दस वर्ष बाद पहली बार आज मिलेंगे बाइडन और पुतिन, तनातनी के बीच जानें

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विश्‍व की दो महाशक्तियों के बीच बुधवार को जिनेवा में एक बेहद खास मुलाकात होने वाली है। ये दो महाशक्तियां अमेरिका और रूस हैं। काफी लंबे समय से चली आ रही तनातनी के अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली ये मुलाकात कई मायनों में खास है। आपको बता दें कि इन दोनों के बीच 10 मार्च 2011 को मास्‍को में आखिरी मुलाकात हुई थी। हालांकि, उस वक्‍त बाइडन अमेरिका के उपराष्‍ट्रपति थे और पुतिन रूस के प्रधानमंत्री थे। वर्तमान मुलाकात के दौरान दोनों के के ही पद बदल चुके हैं।

यहां पर ये भी बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने जहां 20 जनवरी 2021 से राष्‍ट्रपति का पदभार संभाला है व्लादिमीर पुतिन 1999 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे। 2008 से 2012 तक प्रधानमंत्री। 2012 से वे रूस के राष्ट्रपति हैं। वे 1999 से 2000 तक प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। देश और दुनिया में उनकी गिनती एक ताकतवर नेता के रूप में होती आई है। पुतिन और बाइडन के बीच आज होने वाली मुलाकात के बीच इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिर इन दोनों के बीच बातचीत का एजेंडा क्‍या होगा। आपको बता दें कि बीते कुछ वर्षों में अमेरिका और रूस के बीच जो खटास पैदा हुई है उसकी एक नहीं, कई बड़ी वजह हैं। इनमें से एक अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव को प्रभावित करना भी है, जिसको काफी अहम मुद्दा माना जा रहा है।


इसके अलावा अमेरिकी एजेंसियों और निजी कंपनियों पर किए गए साइबर अटैक के लिए भी रूसी राष्‍ट्रपति को ही जिम्‍मेदार ठहराया जाता रहा है। अमेरिका राष्‍ट्रपति पुतिन के सामने उनके विरोधी नेताओं को जहर देकर मारने की कोशिश करने का भी मुद्दा उठा सकता है। पुतिन के घोर विरोधी नेता एलेक्‍सी नवलनी के साथ जो कुछ हुआ उसको लेकर अमेरिका समेत कई देश रूस के खिलाफ हैं। इसके अलावा ब्रिटेन में पूर्व रूसी एजेंट और उनकी बेटी को नर्व एजेंट से मारने की कोशिश के लिए साजिश रचने का आरोप पुतिन पर ही लगा था। नवलनी की गिरफ्तारी और उसके बाद हुए प्रदर्शनों को दबाने और इसके लिए बल प्रयोग करने पर भी अमेरिका और अन्‍य देश पुतिन के खिलाफ हैं। अमेरिका कई बार रूस पर मानवाधिकार उल्‍लंघन का आरोप लगाता रहा है।


दोनों देशों के बीच हथियार एक बड़ा मुद्दा है। हाल के कुछ समय में रूस की रक्षा प्रणाली एस 400 इसकी एक बड़ी वजह बनी है। अमेरिका नहीं चाहता है कि रूस की इस प्रणाली को कोई भी देश खरीदे। इसको लेकर रूस और अन्‍य देशों पर दबाव भी डाला जा रहा है। तुर्की और भारत पर भी ये दबाव डाला गया है। हालांकि दोनों ही देश इससे पीछे हटने से साफ इनकार कर चुके हैं। इसके अलावा सीरिया में पुतिन का सरकार को समर्थन और वहां पर ताबड़तोड़ हमले करना साथ ही सीरियाई फौज को मदद करना हमेशा से ही अमेरिका को नापसंद रहा है। ऐसा ही कुछ यू्क्रेन और लीबिया में भी है। बाइडन के राष्‍ट्रपति बनने के बाद से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्‍तों में भी काफी हद तक गिरावट देखी गई है। पुतिन जहां अमेरिकी जेलों में बंद अपने नागरिकों की रिहाई की बात कर सकते हैं वहीं, बाइडन की रूस की जेलों में बंद अपने नागरिकों के लिए ऐसी ही मांग कर सकते हैं।


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