चीन ने विदेशी प्रतिबंधों से मुकाबले के लिए बनाया नया कानून, विदेशी कंपनियां चिंतित

चीन ने विदेशी प्रतिबंधों से मुकाबले के लिए बनाया नया कानून, विदेशी कंपनियां चिंतित

चीनी संसद ने गुरुवार को विदेशी प्रतिबंध निरोधी कानून पारित कर दिया है। इस कानून के जरिये चीनी अधिकारियों और कंपनियों को विदेशी प्रतिबंधों से कानूनी और सरकारी संरक्षण मिल सकेगा। यह कानून नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्टैंडिंग कमेटी ने पारित किया है।

इस कानून को अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा मानवाधिकार, शिनजियांग और हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के मामलों में चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध के संदर्भ में देखा जा रहा है। नया कानून व्यापक है और चीन पर प्रतिबंध से मुकाबला करने का बड़ा हथियार माना जा रहा है। स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार यह विदेशी प्रतिबंध पर चीन के उपायों को कानूनी वैधता प्रदान करेगा।

नए कानून के प्रविधान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। इसको लेकर विदेशी कंपनियां चीन में निवेश को लेकर चिंतित हो गई हैं। यूरोपीय संघ चैंबर आफ कामर्स ने कहा है कि कानून में पारदर्शिता की कमी है और जल्दबाजी में पारित किया गया है। हांगकांग की एक ला फर्म के विशेषज्ञ ने कहा कि इस कानून के आने से चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियों पर निगरानी बढ़ जाएगी।

नए कानून को पास करने वाले सभी 14 उपाध्यक्षों को अमेरिका ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पारित करने के संबंध में प्रतिबंधित कर रखा है।

मालूम हो कि हाल ही में अमेरिका ने चीन के आर्थिक प्रभाव और व्यापारिक चालबाजियों का मुकाबला करने के लिए सौ अरब डालर (सात लाख 29 हजार करोड़ रुपये) की योजना का एक विधेयक पारित किया था। अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में यह 'यूएस इनोवेशन एंड कंपीटीशन एक्ट' के नाम से लाया गया। यह 32 के मुकाबले 68 मतों से पारित हो गया। 19 रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी इसमें डेमोक्रेट का साथ दिया।


इस विधेयक के कानून बन जाने और बड़ा बजट मिलने के बाद विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार का रास्ता खुलेगा। इससे अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक क्षेत्र में चीन से मुकाबला करने में आसानी होगी। कानून बन जाने के बाद विकास के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति में मदद मिलेगी। इससे नेशनल साइंस फाउंडेशन के वित्त पोषण में सहायता मिलेगी।  

सीनेटर चक ग्रासली ने कहा कि चीन ने अब तक हमारे नवाचार को प्रभावित करने और खरीदने की कोशिश की है। यहां तक कि उसने हमारे नवाचार, शोध-अनुसंधान को चोरी करने के लिए जासूसी तक की है। अब हम उससे आगे निकलने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। बता दें कि विधेयक को अभी निचले सदन हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव से पारित होना है। वहां से पारित होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति जो बाइडन के पास भेजा जाएगा।


धरती पर हैं चार नहीं, पांच महासागर? अंटार्कटिका के पास है कुछ सबसे अनोखा

धरती पर हैं चार नहीं, पांच महासागर? अंटार्कटिका के पास है कुछ सबसे अनोखा

हमारी धरती का 75 परसेंट भाग पानी में डूबा हुआ है. सात महाद्वीपों के साथ चार महासागर जीवन का आधार हैं. हालांकि, नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार महासागर चार नहीं बल्कि पांच हैं. इसके अनुसार अंटार्कटिका के पास दक्षिणी महासागर भी अपने आप में एक अलग महासागर है और उसे आर्कटिक, अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर के साथ स्थान मिलनी चाहिए. नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी जियोग्राफर अलेक्स टेट के अनुसार वैज्ञानिक तो अंटार्कटिक दक्षिणी महासागर को अलग मानते रहे हैं लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई जबकि दुनिया का यह भाग बहुत खास है. (UK Ministry of Defence/REUTERS)

Southern Ocean of Antarctica: अंटार्कटिका के पास पानी का करंट इतना अलग है कि National Geographic ने इसे अलग महासागर मान लिया है.



हमारी धरती का 75 परसेंट भाग पानी में डूबा हुआ है. सात महाद्वीपों के साथ चार महासागर जीवन का आधार हैं. हालांकि, नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार महासागर चार नहीं बल्कि पांच हैं. इसके अनुसार अंटार्कटिका के पास दक्षिणी महासागर भी अपने आप में एक अलग महासागर है और उसे आर्कटिक, अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागर के साथ स्थान मिलनी चाहिए. नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी जियोग्राफर अलेक्स टेट के अनुसार वैज्ञानिक तो अंटार्कटिक दक्षिणी महासागर को अलग मानते रहे हैं लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय सहमति नहीं बन पाई जबकि दुनिया का यह भाग बहुत खास है. (UK Ministry of Defence/REUTERS)



अब तक कहां छिपा था?

नैशनल जियोग्राफिक के अनुसार यह महासागर अंटार्कटिका के तट से 60 डिग्री दक्षिण की ओर है और दूसरे राष्ट्रों से किसी महाद्वीप नहीं बल्कि अपने करंट की वजह से अलग होता है. इसके अंदर आने वाले क्षेत्र अमेरिका से दोगुना है. सोसायटी आमतौर पर इंटरनैशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन के नामों को मानती है जिसने 1937 की गाइडलाइन्स में दक्षिणी महासागर को अलग माना था लेकिन 1953 में इसे बाहर कर दिया. इसके बावजूद अमेरिका के जियोग्राफिक नेम्स बोर्ड ने 1999 से दक्षिणी महासागर नाम का इस्तेमाल किया है. फरवरी में National Oceanic and Atmospheric Administration ने इसे मान लिया. (फोटो: British Antarctic Survey Reuters)



खतरों से घिरा

यह कदम कई अर्थ में खास है. नैशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर एनरिक साला ने बताया है कि दक्षिणी महासगर में बहुत अनोखे और गम्भीर जलीय ईकोसिस्टम पाए जाते हैं जहां वेल, पेंग्विन्स और सील्स जैसे जीव रहते हैं. ऐसी हजारों प्रजातियां हैं जो केवल यहीं रहती हैं, और कहीं नहीं पाई जातीं. इस क्षेत्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है. ऐसे में संरक्षण की आवश्यकता के चलते भी इसे अलग से मान्यता देना अहम हो जाता है. इसके अतिरिक्त जलवायु बदलाव का प्रभाव भी पड़ रहा है. पिछले महीने दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड अंटार्कटिका से अलग हो गया. फरवरी में भी एक विशाल हिमखंड टूट गया था. (Reuters)



कब बना था?

एक खास अंटार्कटिक सर्कमपोलर करंट भारी मात्रा में पानी ट्रांसपोर्ट करता है और पूरे विश्व में ऐसे सर्कुलेशन सिस्टम को चलाता है जो धरती पर गर्मी ट्रांसपोर्ट करता है. नैशनल जियोग्राफिक 1915 से मैप तैयार कर रहा है और इसके करंट के आधार पर कार्टोग्राफर्स ने यह निर्णय किया है. वर्ल्ड वाइड फंड के अनुसार यह महासागर सबसे हाल में बना महासागर हुआ. यह 3 करोड़ वर्ष पहले बना था जब अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका एक-दूसर से अलग हुए थे. टेट का बोलना है कि इस महासागर के बारे में लोगों को अलग से बताया-पढ़ाया नहीं गया तो इसकी जरूरतों, सम्मान और खतरों को समझा नहीं जा सकेगा.


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