5 वर्ष में हवाई हमलों का शिकार हुए 1600 बच्‍चे, अफगानिस्‍तान बना बच्‍चों की कब्रगाह

5 वर्ष में हवाई हमलों का शिकार हुए 1600 बच्‍चे, अफगानिस्‍तान बना बच्‍चों की कब्रगाह

दशकों से गृहयुद्ध की विभ‍िषिका झेल रहा अफगानिस्‍तान बच्‍चों के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है. ताजा अध्ययन में बोला गया है कि पिछले 5 वर्ष में हवाई हमलों में मारे गए कुल लोगों में 40 प्रतिशत बच्‍चे हैं. एक्‍शन ऑन आर्म्‍ड वाइलेंस की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़े में बोला गया है कि साल 2016 से 2020 के बीच में किए गए हवाई हमले में 1598 बच्‍चे मारे गए या घायल हो गए. यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है जब अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बालिका विद्यालय में किए गए भीषण बम धमाके में 50 लोग मारे गए हैं. गृह मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में अधिकांश 11 से 15 वर्ष की लड़कियां हैं. पीड़ित परिजनों ने रविवार को अपने प्रियजनों को सुपुर्दे खाक कर दिया.


Afghanistan Air Strike Children : भीषण आतंकवादी हमले का सामना कर रहा अफगानिस्‍तान देश का भविष्‍य कहे जाने वाले बच्‍चों की कब्रगाह बनता जा रहा है. पिछले 5 वर्ष में हुए इन हमलों में कम से कम 1600 बच्‍चे मारे गए हैं.


दशकों से गृहयुद्ध की विभ‍िषिका झेल रहा अफगानिस्‍तान बच्‍चों के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है. ताजा अध्ययन में बोला गया है कि पिछले 5 वर्ष में हवाई हमलों में मारे गए कुल लोगों में 40 प्रतिशत बच्‍चे हैं. एक्‍शन ऑन आर्म्‍ड वाइलेंस की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़े में बोला गया है कि साल 2016 से 2020 के बीच में किए गए हवाई हमले में 1598 बच्‍चे मारे गए या घायल हो गए. यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है जब अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बालिका विद्यालय में किए गए भीषण बम धमाके में 50 लोग मारे गए हैं. गृह मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में अधिकांश 11 से 15 वर्ष की लड़कियां हैं. पीड़ित परिजनों ने रविवार को अपने प्रियजनों को सुपुर्दे खाक कर दिया.

​अमेरिका के हवाई हमले की संख्‍या तीन गुना हुई

गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि तारिक अरियान ने बताया कि शनिवार के इस हमले में घायलों की संख्या भी 100 के पार हो गई है. सेव द चिल्‍ड्रेन इंटरनैशनल संस्‍था की अफगानिस्‍तान के डायरेक्‍टर क्रिस न्‍यामंडी ने कहा, 'दुखद, ये आंकड़े आश्‍चर्य में नहीं डालते हैं. अफगानिस्‍तान पिछले कई वर्षों से बच्‍चों के लिए बहुत खतरनाक रहा है.' अफगानिस्‍तान से इस वर्ष अमेरिकी सेना हट रही है और संस्‍था के आंकड़ों के अनुसार साल 2017 से लेकर साल 2019 के बीच में अंतरराष्‍ट्र‍ीय गठबंधन ने अपने हमलों की संख्‍या को 247 के मुकाबले तीन गुना करते हुए 757 तक पहुंचा दिया. संयुक्‍त राष्‍ट्र ने इन हमलों पर चिंता जताई थी लेकिन किसी ने उस पर ध्‍यान नहीं दिया. न्‍यामंडी ने बोला कि पिछले 14 वर्ष से प्रत्येक दिन अफगानिस्‍तान में 5 बच्‍चे या तो मारे जाते हैं या घायल हो जाते हैं. एक्‍शन ऑन आर्म्‍ड वाइलेंस के कार्यकारी निदेशक इअइन ओवेर्टन ने बोला कि अमेरिका ने साल 2018-19 में इतने ज्‍यादा बम बरसाए जितना उसने साल 2011 में भी नहीं गिराए थे जब अमेरिकी अभ‍ियान चरम पर था. इस बमबारी की वजह से अफगानिस्‍तान बच्‍चों के लिए सबसे खतरनाक वर्ष रहा.

​50 लोगों की मृत्यु से गुस्‍से में अफगान परिवार

इस बीच काबुल में बालिका विद्यालय में किए गए भीषण बम धमाके में मरने वालों की संख्‍या बढ़कर 50 हो गई है. गृह मंत्रालय ने बताया कि मरने वालों में अधिकांश 11 से 15 वर्ष की लड़कियां हैं. शनिवार के इस हमले में घायलों की संख्या भी 100 के पार हो गई है. राजधानी के पश्चिमी इलाके दश्त-ए-बरची में जब परिजन मृतकों को दफना रहे थे तो उनके भीतर दुख के साथ ही आक्रोश भी था. मोहम्मद बारीक अलीज़ादा (41) ने कहा, 'सरकार घटना के बाद प्रतिक्रिया देती है. वह घटना से पहले कुछ नहीं करती है.' अलीज़ादा की सैयद अल-शाहदा स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली भतीजी लतीफा की हमले में मृत्यु हुई है. अरियान ने बताया कि स्कूल की छुट्टी होने के बाद विद्यार्थी जब बाहर निकल रहे थे तब स्कूल के प्रवेश द्वार के बाहर तीन धमाके हुए. ये धमाके राजधानी के पश्चिम में स्थित शिया बहुल इलाके में हुए हैं. तालिबान ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है और घटना की निंदा की है.

​हजारा शिया मुसलमानों को हमले में बनाया निशाना

अरियान ने बताया कि पहला धमाका विस्फोटकों से लदे एक वाहन से किया गया जिसके बाद दो और धमाके हुए. साथ ही उन्होंने बोला कि हताहतों की संख्या अब भी बढ़ सकती है. लगातार बम धमाकों से दहली रहने वाली राजधानी में शनिवार को हुआ हमला अब तक का सबसे निर्मम हमला है. अमेरिकी और नाटो बलों की आखिरी टुकड़ियों की अफगानिस्तान से वापसी प्रक्रिया पूरी करने के बीच सुरक्षा के अभाव और अधिक हिंसा बढ़ने के डर को लेकर आलोचनाएं तेज होती जा रही हैं. इन हमलों में पश्चिमी दश्त-ए-बरची इलाके के हाजरा समुदाय को निशाना बनाया गया जहां ये धमाके किए गए वहां अधिकतर हजारा शिया मुसलमान हैं. यह क्षेत्र अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमलों के लिये कुख्यात है और इन हमलों की जिम्मेदारी अक्सर देश में सक्रिय इस्लामिक स्टेट से संबद्ध संगठन लेते हैं. कट्टर सुन्नी मुस्लिम समूह ने अफगानिस्तान के शिया मुस्लिमों के विरूद्ध जंग की घोषणा की है.

​स्कूल के बाहर दिखे खून से सने स्कूल बैग और किताबें

इसी इलाके में पिछले वर्ष जच्चा बच्चा हॉस्पिटल में हुए क्रूर हमले के लिए अमेरिका ने आईएस को उत्तरदायी ठहराया था जिसमें गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु मारे गए थे. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधि अधीन दस्तीगार नाज़री ने बोला कि बम धमाकों के बाद, गुस्साई भीड़ ने एंबुलेंसों और यहां तक कि स्वास्थ्य कर्मियों पर भी हमला किया जो घायलों को निकालने की प्रयास कर रहे थे. उन्होंने निवासियों से योगदान करने और एम्बुलेंसों को घटनास्थल पर जाने देने की अपील की. अरियान ने हमले के लिए तालिबान को उत्तरदायी ठहराया है, बावजूद इसके कि उसने इससे मना किया है. सईद अल शाहदा स्कूल के बाहर खून से सने स्कूल बैग और किताबें बिखरी पड़ीं थी. प्रातः काल में, इस विशाल स्कूल परिसर में लड़के पढ़ते हैं और दोपहर में लड़कियों के लिये कक्षाएं चलती हैं. रविवार को दश्त-ए-बरची के हजारा समुदाय के नेताओं ने मीटिंग की और जातीय हजारा समुदाय की सुरक्षा में सरकार की नाकामी पर हताशा जताई और समुदाय का एक सुरक्षा बल बनाने का निर्णय किया. सांसद अधीन हुसैन नसेरी ने बोला कि बल को स्कूलों, मस्जिदों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के बाहर तैनात किया जाएगा और वे सरकारी सुरक्षा बलों से योगदान करेंगे. हमले के बाद, अधिकांश जख्मियों को युद्ध में घायलों के लिए बने इमरजेंसी हॉस्पिटल ले जाया गया. अफगानिस्तान में हॉस्पिटल प्रोग्राम के समन्वयक मैक्रों पुनतिन ने बोला कि सभी लड़कियां 12 से 20 साल की आयु की थीं.


दस वर्ष बाद पहली बार आज मिलेंगे बाइडन और पुतिन, तनातनी के बीच जानें

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विश्‍व की दो महाशक्तियों के बीच बुधवार को जिनेवा में एक बेहद खास मुलाकात होने वाली है। ये दो महाशक्तियां अमेरिका और रूस हैं। काफी लंबे समय से चली आ रही तनातनी के अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली ये मुलाकात कई मायनों में खास है। आपको बता दें कि इन दोनों के बीच 10 मार्च 2011 को मास्‍को में आखिरी मुलाकात हुई थी। हालांकि, उस वक्‍त बाइडन अमेरिका के उपराष्‍ट्रपति थे और पुतिन रूस के प्रधानमंत्री थे। वर्तमान मुलाकात के दौरान दोनों के के ही पद बदल चुके हैं।

यहां पर ये भी बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने जहां 20 जनवरी 2021 से राष्‍ट्रपति का पदभार संभाला है व्लादिमीर पुतिन 1999 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे। 2008 से 2012 तक प्रधानमंत्री। 2012 से वे रूस के राष्ट्रपति हैं। वे 1999 से 2000 तक प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। देश और दुनिया में उनकी गिनती एक ताकतवर नेता के रूप में होती आई है। पुतिन और बाइडन के बीच आज होने वाली मुलाकात के बीच इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिर इन दोनों के बीच बातचीत का एजेंडा क्‍या होगा। आपको बता दें कि बीते कुछ वर्षों में अमेरिका और रूस के बीच जो खटास पैदा हुई है उसकी एक नहीं, कई बड़ी वजह हैं। इनमें से एक अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव को प्रभावित करना भी है, जिसको काफी अहम मुद्दा माना जा रहा है।


इसके अलावा अमेरिकी एजेंसियों और निजी कंपनियों पर किए गए साइबर अटैक के लिए भी रूसी राष्‍ट्रपति को ही जिम्‍मेदार ठहराया जाता रहा है। अमेरिका राष्‍ट्रपति पुतिन के सामने उनके विरोधी नेताओं को जहर देकर मारने की कोशिश करने का भी मुद्दा उठा सकता है। पुतिन के घोर विरोधी नेता एलेक्‍सी नवलनी के साथ जो कुछ हुआ उसको लेकर अमेरिका समेत कई देश रूस के खिलाफ हैं। इसके अलावा ब्रिटेन में पूर्व रूसी एजेंट और उनकी बेटी को नर्व एजेंट से मारने की कोशिश के लिए साजिश रचने का आरोप पुतिन पर ही लगा था। नवलनी की गिरफ्तारी और उसके बाद हुए प्रदर्शनों को दबाने और इसके लिए बल प्रयोग करने पर भी अमेरिका और अन्‍य देश पुतिन के खिलाफ हैं। अमेरिका कई बार रूस पर मानवाधिकार उल्‍लंघन का आरोप लगाता रहा है।


दोनों देशों के बीच हथियार एक बड़ा मुद्दा है। हाल के कुछ समय में रूस की रक्षा प्रणाली एस 400 इसकी एक बड़ी वजह बनी है। अमेरिका नहीं चाहता है कि रूस की इस प्रणाली को कोई भी देश खरीदे। इसको लेकर रूस और अन्‍य देशों पर दबाव भी डाला जा रहा है। तुर्की और भारत पर भी ये दबाव डाला गया है। हालांकि दोनों ही देश इससे पीछे हटने से साफ इनकार कर चुके हैं। इसके अलावा सीरिया में पुतिन का सरकार को समर्थन और वहां पर ताबड़तोड़ हमले करना साथ ही सीरियाई फौज को मदद करना हमेशा से ही अमेरिका को नापसंद रहा है। ऐसा ही कुछ यू्क्रेन और लीबिया में भी है। बाइडन के राष्‍ट्रपति बनने के बाद से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्‍तों में भी काफी हद तक गिरावट देखी गई है। पुतिन जहां अमेरिकी जेलों में बंद अपने नागरिकों की रिहाई की बात कर सकते हैं वहीं, बाइडन की रूस की जेलों में बंद अपने नागरिकों के लिए ऐसी ही मांग कर सकते हैं।


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