यूरोपीय राष्ट्रों की परंपरागत पेंशन प्रणाली है संकट में

यूरोपीय राष्ट्रों की परंपरागत पेंशन प्रणाली है संकट में

यूरोपीय राष्ट्रों की परंपरागत पेंशन प्रणाली संकट में है. इसकी वजह आबादी घटना व औसत आयु बढऩा है. इससे पेंशन कोष में सहयोग देने वाले कम हो रहे हैं व पेंशन भुगतान की अवधि बढ़ रही है. मौजूदा पेंशन प्रणाली के कारण 2025 तक फ्रांस सरकार को 13 खरब रुपए का घाटा होने कि सम्भावना है. राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रों पुरानी पेंशन स्कीम को बंद कर नयी ‘यूनिवर्सल पॉइंट बेस्ट पेंशन प्रणाली’ लागू करना चाहते हैं. इसमें रिटायरमेंट की आयु को 62 साल से बढ़ाकर 64 साल करने का प्रस्ताव है.

विरोध की वजह भी यही है, लोगों का बोलना है कि भविष्य में पेंशन के लिए उन्हें दो साल अधिक कार्य करना पड़ेगा. तय समय से पहले रिटायरमेंट लेने पर पेंशन भी कम मिलेगी. फ्रांस में अभी व्यक्तिगत व सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए 42 भिन्न-भिन्न पेंशन स्कीम चल रही हैं. इनमें सेवानिवृत्ति की आयु भी भिन्न-भिन्न है. नयी पेंशन स्कीम के विरोध में शिक्षक, पुलिस, वकील, अस्पताल व अन्य सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं.