ये देश लिखना पढ़ना नहीं जानते, क्या सच में है ऐसा ?

ये देश लिखना पढ़ना नहीं जानते, क्या सच में है ऐसा ?

कोरोना की वजह से पैदा हुए आर्थिक संकट से सभी देश जूझ रहे हैं। इनमें कनाडा जैसे अमीर देश भी शामिल हैं। आर्थिक रिकवरी में सभी देश अपनी अपनी तरह से जुटे हुए हैं। लेकिन कनाडा के सामने एक संकट है। ये संकट है साक्षरता का। जी हाँ, कनाडा की व्यस्क जनसँख्या में ये एक बड़ी समस्या है। एडल्ट कनाडियन नागरिकों में पढ़ने, लिखने और गणित की काफी कमजोरी है। साक्षरता में यह दरार देश की इकॉनमी और डेमोक्रेसी के लिए ख़राब परिणाम ला सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि साक्षरता में कमी की वजह कनाडा में ऐसे रोजगार की भरमार रही है जिसमें लिखने-पढ़ने जैसी स्किल्स की जरूरत नहीं होती।

बेसिक स्किल्स सीखने कर हाई स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं
ज्यादातर कनाडियन साक्षरता के बेसिक स्किल्स सीखने कर हाई स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। स्कूल में जो कुछ सीखा है उसे बनाये रखने के लिए प्रैक्टिस की जरूरत होती है लेकिन कनाडा की अर्थव्यस्था ऐसी है कि बहुत से कामगारों को अपनी स्कूली शिक्षा को प्रैक्टिस में लाने का अवसर ही नहीं मिलता। मतलब ये कि स्कूल में सीखे गए गणित, कॉम्प्रिहेंशन, लेखन का उपयोग करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कनाडा में शिक्षा की दर काफी ऊंची है लेकिन इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि हर 6 में से एक कनाडियन एडल्ट साक्षरता का बेसिक टेस्ट पास नहीं कर सकता। आंकड़े बताते हैं कि कनाडा में बहुत लोग नौकरी के लिए आवेदन लिखने, समाचार पढ़ने या ईमेल भेजने जैसे सामान्य टास्क नहीं कर पाते हैं। कनाडा की आधी व्यस्क आबादी हाई स्कूल स्तर की परीक्षा पास करने में नाकाम है।

अर्थशास्त्री माइकल बर्ट के अनुसार
कनाडा के अर्थशास्त्री माइकल बर्ट के अनुसार व्यस्क साक्षरता के मामले में कनाडा अन्य ओईसीडी देशों की तुलना में औसत से नीचे है। जानकारों के अनुसार ऐसे लोग कनाडा में पैदा हुए और पीला-बढ़े हैं और भाषा, गणित और कंप्यूटर साक्षरता में पिछड़े हैं वो अपनी कमियां बखूबी छिपा लेते हैं।

साक्षरता स्किल्स की बहुत मांग नहीं रही है
दरअसल कनाडा की अर्थव्यवस्था में कृषि, खनन और जंगल की लकड़ी का बड़ा हिस्सा है और ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ साक्षरता स्किल्स की बहुत मांग नहीं रही है। जब लोगों के रोजगार में पढ़ने-लिखने जैसी स्किल्स की कोई बड़ी भूमिका नहीं रहती तब धीरे धीरे वो भी खत्म होने लगता है जो कुछ स्कूल में सीखा था। साक्षरता में कमी के कारण कनाडियन लोगों में सोच समझ कर आर्थिक निर्णय लेने की कश्मता भी प्रभावित होती है। यानी वे गलत फैसले ले कर अपना ही नुक्सान कर बैठते हैं।


FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, इमरान सरकार को लगा बड़ा झटका!

FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, इमरान सरकार को लगा बड़ा झटका!

नई दिल्ली: आर्थिक तंगी झेल रही पाकिस्तान की इमरान सरकार की दिक्कतें कम होती नहीं दिख रही हैं। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से पाकिस्तान को फिर कोई राहत नहीं मिली है। आतंकियों पर कार्रवाई करने में विफल पाकिस्तान को एफएटीएफ ने जून तक के लिए अपनी ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 27 सूत्रीय कारवाई योजना को पूरी तरह लागू करने का कड़ा निर्देश भी दिया है। पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिश में जुटा हुआ था मगर संगठन की ओर से की गई इस कार्रवाई से पाकिस्तान को करारा झटका लगा है।

आतंकियों के खिलाफ करनी होगी कार्रवाई
एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया था और उसके बाद से पाकिस्तान लगातार ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिश में जुटा हुआ है मगर वह एफएटीएफ को संतुष्ट करने में नाकाम रहा है।

एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्यलेर ने कहा कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की चिंताओं को जल्द से जल्द दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दी गई समय सीमा पहले ही खत्म हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने 27 में से 24 बिंदुओं पर कार्रवाई पूरी कर ली है मगर संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से सूचीबद्ध आतंकियों और उनके मददगार उनके खिलाफ कार्रवाई की दिशा में भी ठोस कदम उठाना होगा।

पाक ने नहीं उठाए पर्याप्त कदम
एफएटीएफ का साफ तौर पर कहना है कि अभी आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने में पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं है और इनमें गंभीर खामियां हैं। पाकिस्तान की अदालतों को आतंकवाद में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की दिशा में कदम उठाना होगा।

रोकनी होगी आतंकियों को मदद
एफएटीएफ का कहना है कि पाकिस्तान को तीन अधूरे कार्यों को पूरा करना होगा तभी वह ग्रे लिस्ट से बाहर आने में कामयाब हो सकता है। संगठन की जून में होने वाली अगली बैठक में पाकिस्तान के मौजूदा दर्जे पर फिर से फैसला किया जाएगा।

पाकिस्तान को ऐसे आतंकियों और उनके मददगारों पर प्रभावी व ठोस कार्रवाई करनी होगी जो संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नामित हैं। इसके साथ ही उसे आतंकी फंडिंग की समस्या से निपटने के लिए एक प्रभावी प्रणाली भी बनानी होगी।

संगठन का कहना है कि यदि पाकिस्तान ने तीन अधूरे कार्यों को पूरा करने में कामयाबी हासिल की तो जून में होने वाली अगली बैठक में उसके कदमों की समीक्षा के बाद अगला फैसला किया जाएगा।


आतंकी की रिहाई पर तीखी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने हाल में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के मुख्य आरोपी आतंकी उमर सईद शेख को बरी कर दिया था। पर्ल की 2002 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी।

उमर सईद शेख को बरी करने पर अंतरराष्ट्रीय जगत ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। अमेरिका ने पाकिस्तान की अदालत के इस फैसले पर गुस्सा जताते हुए पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई थी। दुनिया के कई अन्य देशों ने भी इस कदम पर नाराजगी जताई थी।

नहीं पूरा हो सका पाकिस्तान का सपना
पाकिस्तान इस बार और तुर्की और चीन की मदद से ग्रे लिस्ट से बाहर आने का सपना देख रहा था मगर पाकिस्तान का यह सपना पूरा नहीं हो सका है। पाकिस्तान जून 2018 से ही ग्रे लिस्ट में बना हुआ है।

इसके बाद हुई एफएटीएफ की कई बैठकों में उसने ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिश की है मगर अभी तक उसे कामयाबी नहीं मिल सकी है।

आतंकियों की मदद करता है पाक
एफएटीएफ की ओर से पाकिस्तान को पिछले साल अक्टूबर में सभी 28 बिंदुओं को लागू करने के लिए कहा गया था मगर पाकिस्तान अभी तक सभी बिंदुओं पर कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।

पाकिस्तान दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करता है मगर पिछले दरवाजे से आतंकियों की मदद भी करता रहा है। जम्मू-कश्मीर में हुई कई आतंकी घटनाओं में पाकिस्तान और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से मदद दिए जाने की पुष्टि भी हो चुकी है।


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