महाभियोग के फंदे में फंसे ट्रंप, राष्ट्रपति के खिलाफ डेमोक्रेट एकजुट

महाभियोग के फंदे में फंसे ट्रंप, राष्ट्रपति के खिलाफ डेमोक्रेट एकजुट

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में महाभियोग के फंदे में फंस गए हैं। अमेरिकी संसद भवन में पिछले बुधवार को हुई हिंसा के लिए प्रतिनिधि सभा के डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया है।

प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप ने अमेरिकी संसद में हिंसा के लिए अपने समर्थकों को भड़काया। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट सांसदों का प्रभुत्व है और ट्रंप के खिलाफ पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान की संभावना जताई जा रही है।

ट्रंप के खिलाफ दो प्रस्ताव पेश
अमेरिकी संसद में गत बुधवार को हुई तोड़फोड़ और हिंसा की घटना में अभी तक एक पुलिसकर्मी सहित पांच लोगों की मौत हो चुकी है। लोकतांत्रिक परंपराओं के पालन में अभी तक अमेरिका की मिसाल दी जाती रही है मगर अमेरिकी संसद में हुई इस घटना से देश की छवि को काफी धक्का लगा है।

हिंसा की घटना को लेकर ट्रंप के खिलाफ दो महाभियोग प्रस्ताव पेश किए गए हैं। इनमें से एक प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य इलहान उमर ने तैयार किया है जबकि दूसरा प्रस्ताव डेमोक्रेट सांसद जेमी रस्किन ने तैयार किया है।

प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में लामबंदी
प्रस्ताव पेश होने के बाद प्रतिनिधि सभा में बहुमत के नेता स्टेनी होयर ने कहा कि अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता है तो ट्रंप पहले ऐसे रिपब्लिकन राष्ट्रपति होंगे जिन्हे दो बार महाभियोग प्रस्ताव का सामना करना पड़ा।

दूसरी ओर महाभियोग प्रस्ताव लाने के फैसले का विरोध करते हुए रिपब्लिकन सांसद एलेक्स मूने ने कहा की सदन को महाभियोग का यह प्रस्ताव नामंजूर कर देना चाहिए। ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेट्स व कुछ रिपब्लिकन सांसद एकजुट हो गए हैं और उनका मानना है कि ट्रंप को अपना कार्यकाल नहीं पूरा करना देना चाहिए।

पेलोसी के पत्र के बाद डेमोक्रेट एकजुट
सीनेट की स्पीकर नैंसी पेलोसी सहित उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई दूसरे नेता राष्ट्रपति ट्रंप को व्हाइट हाउस से बाहर करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। पेलोसी ने ट्रंप को पद से हटाने के लिए 25वें संशोधन के लिए पत्र लिखा था जिसके बाद डेमोक्रेट सांसद एकजुट हो गए हैं।

यह संशोधन उपराष्ट्रपति व बहुमत को अधिकार देता है कि वे ट्रंप को हटाएं। प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष पेलोसी ने आरोपों का मसौदा संसद में रखने से पहले कहा कि हमारे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी हो गया है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप के पद पर बने रहने से देश के संविधान को खतरा है।

प्रस्ताव पर वोटिंग की स्थिति
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत हासिल है और माना जा रहा है कि वहां से महाभियोग का प्रस्ताव आसानी से पास हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि कई रिपब्लिकन सांसद भी ट्रंप के खिलाफ वोटिंग कर सकते हैं।

वैसे अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए सीनेट में भी वोटिंग कराना जरूरी है। राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए दो तिहाई सीनेटरों की सहमति जरूरी है। सीनेट में इस समय रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत हासिल है और ऐसे में हर किसी की नजर सीनेट में प्रस्ताव को लेकर होने वाले फैसले पर टिकी है।

रिपब्लिकन पार्टी के नेता भी नाराज
वैसे राष्ट्रपति ट्रंप से रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता भी नाराज हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति ट्रंप से नाता तोड़ लिया है। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने कहा है कि वे ट्रंप को पद से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे।

डेमोक्रेटिक पार्टी को कम से कम 16 रिपब्लिकन सीनेटर का समर्थन चाहिए और इतने ज्यादा सीनेटरों का समर्थन मिलना मुश्किल माना जा रहा है।

शपथ ग्रहण समारोह में कड़ी सुरक्षा की मांग
दूसरी ओर वाशिंगटन की मेयर मुरियल बाउजर ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन के शपथ ग्रहण समारोह में कड़ी सुरक्षा का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने गृह सुरक्षा मंत्रालय से इस संबंध में न्याय व रक्षा मंत्रालय के अलावा सुप्रीम कोर्ट और कांग्रेस से भी संपर्क करने को कहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद में हुई हिंसा को आतंकी हमला बताते हुए कहा कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए शपथ ग्रहण समारोह में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।


राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति  जो बाइडेन ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए  बड़ा फैसला लिया है।  अमेरिका आने वाले हर यात्री को क्वारंटीन रहना होगा, निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही आगे जाने की अनुमति होगी।

अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बावजूद चीन और पाकिस्तान के प्रति नीतियों में बदलाव नहीं होगा। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन भी भारत के साथ सीमा विवाद में चीन के साथ सख्ती की नीति पर चलता रहेगा। बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को आतंकियों को मदद करने के खिलाफ आगाह किया गया है।

अमेरिका के भावी रक्षा मंत्री जनरल (रिटायर्ड) लॉयड ऑस्टिन ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा। लश्कर ए तोयबा और अन्य भारत विरोधी आतंकियों को मदद पहुंचाने की नीयत से बाज आना होगा।

उन्होंने चीन के खिलाफ भी सख्त रवैये का संकेत दिया। इससे साफ है कि बिडेन प्रशासन चीन और पाकिस्तान दोनों देशों के खिलाफ पहले की तरह सख्त नीति अपनाएगा।

चरमपंथी संगठनों पर लगाम लगाए पाक
ऑस्टिन ने साफ किया कि मेरा उद्देश्य भारत के साथ रक्षा संबंधों के लिए साझेदारी को जारी रखना होगा। ऑस्टिन ने सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों को बताया कि वे अमेरिका और भारतीय साझा सैन्य हितों के सहयोग के लिए प्रयास करेंगे।

उन्होंने सदस्यों को बताया कि वे पाकिस्तान से साफ तौर पर कहेंगे कि वह हिंसक चरमपंथी संगठनों और आतंकवादियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोके।

कार्रवाई न करने पर जताई नाराजगी
उन्होंने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर पाकिस्तान के प्रति गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी आतंकी संगठनों लश्कर और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ पाकिस्तान सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया है।

पाक को बदलना होगा रवैया
ऑस्टिन ने कहा कि 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद आतंकी हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि पाकिस्तान आतंकियों पर लगाम लगाने में मदद नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा और आतंकियों पर नकेल कसनी होगी। हमें आतंकियों के साथ नरम रवैया की नीति मंजूर नहीं है।

उन्होंने भविष्य में भी भारत के साथ रक्षा सहयोग जारी रखने का एलान करते हुए कहा कि हम क्वाड के जरिए रक्षा सहयोग के दायरे को और बढ़ाने की कोशिश करेंगे। क्वाड में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भारत भी शामिल है।

विदेश मंत्री का सहयोग जारी रखने का संकेत
अमेरिका के नामित विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने भी भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नीति जारी रखने का संकेत दिया है। ब्लिंकन ने सीनेट की विदेशी मामलों की समिति के सामने रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति का समर्थन किया।

चार घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस बैठक में उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग की नीति क्लिंटन प्रशासन के आखिरी दिनों में शुरू हुई थी। ओबामा प्रशासन के दौर में रक्षा खरीद और सूचना साझेदारी में सहयोग बढ़ा। ट्रंप प्रशासन ने इसे आगे बढ़ाकर हिंद प्रशांत सहयोग की रणनीति पर काम किया।

चीन की चुनौती का करेंगे सामना
उन्होंने कहा कि इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि एक राष्ट्र के तौर पर हमारे हितों को सबसे अधिक चुनौती चीन की ओर से पेश की जा रही है। अमेरिका को इस चुनौती का सामना करना है और हम पूरी मजबूती से इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि चीन समेत कोई भी देश भारतीय संप्रभुता को चुनौती न दे सके। आतंक के मुद्दे पर भी हम भारत के साथ हैं। दोनों देशों के आपसी रिश्तो को मजबूत बनाने के लिए बहुत सारे रास्ते हैं और हम निश्चित रूप से भारत के साथ दोस्ती का रुख बनाए रखेंगे।


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