चीन की सायनोफार्म वैक्सीन खरीदेगा पाकिस्तान, फरवरी तक 12 लाख डोज मिलने की उम्मीद

चीन की सायनोफार्म वैक्सीन खरीदेगा पाकिस्तान, फरवरी तक 12 लाख डोज मिलने की उम्मीद

पाकिस्तान सरकार ने चीन की सायनोफार्म वैक्सीन खरीदने का फैसला कर लिया है। प्रधानमंत्री इमरान खान के स्पेशल असिस्टेंट फैसल सुल्तान के मुताबिक, लंबी बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने चीनी वैक्सीन खरीदने का फैसला किया है। सुल्तान के मुताबिक, फरवरी तक 12 लाख डोज पाकिस्तान पहुंच जाएंगे। पाकिस्तानी मीडिया में पहले ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है इसलिए, वो चीनी वैक्सीन ही खरीदेगी।

कीमत का खुलासा नहीं
‘जियो न्यूज’ के मुताबिक, इमरान खान ने मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग की। इसके बाद डॉक्टर फैसल सुल्तान ने चीन से वैक्सीन खरीदने की जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इस वैक्सीन की कीमत क्या होगी। यह जानकारी जरूर दी गई कि फरवरी तक 12 लाख डोज पाकिस्तान पहुंच जाएंगे। फैसल के मुताबिक, मार्च के पहले हफ्ते से वैक्सीनेशन प्रॉसेस शुरू हो सकता है।

पहले फ्रंटलाइन वर्कर्स को मिलेगी
सुल्तान ने कहा- वैक्सीन के लिए दुनिया की कई कंपनियों से बातचीत की गई थी। हमें चीन की वैक्सीन ही मुफीद लगी। नेशनल कमांड एंड ऑपरेशन सेंटर ने फ्रंटलाइन वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। ये वे लोग हैं जिन्हें पहले फेज में वैक्सीनेट किया जाएगा। पहले फेज में 12 लाख वैक्सीन आएंगी। इसके बाद हम कुछ और ऑर्डर जारी करेंगे।

आम लोगों को सितंबर से मिलेगी वैक्सीन
पाकिस्तान सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के लिए रजिस्ट्रेशन और कीमत अलग रखने का फैसला किया है। इसके लिए ड्रग रेग्युलेट्री अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का कहना है कि आम लोगों का वैक्सीनेशन जून के बाद ही शुरू किया जाएगा। साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि सितंबर तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।


राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति  जो बाइडेन ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए  बड़ा फैसला लिया है।  अमेरिका आने वाले हर यात्री को क्वारंटीन रहना होगा, निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही आगे जाने की अनुमति होगी।

अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बावजूद चीन और पाकिस्तान के प्रति नीतियों में बदलाव नहीं होगा। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन भी भारत के साथ सीमा विवाद में चीन के साथ सख्ती की नीति पर चलता रहेगा। बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को आतंकियों को मदद करने के खिलाफ आगाह किया गया है।

अमेरिका के भावी रक्षा मंत्री जनरल (रिटायर्ड) लॉयड ऑस्टिन ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा। लश्कर ए तोयबा और अन्य भारत विरोधी आतंकियों को मदद पहुंचाने की नीयत से बाज आना होगा।

उन्होंने चीन के खिलाफ भी सख्त रवैये का संकेत दिया। इससे साफ है कि बिडेन प्रशासन चीन और पाकिस्तान दोनों देशों के खिलाफ पहले की तरह सख्त नीति अपनाएगा।

चरमपंथी संगठनों पर लगाम लगाए पाक
ऑस्टिन ने साफ किया कि मेरा उद्देश्य भारत के साथ रक्षा संबंधों के लिए साझेदारी को जारी रखना होगा। ऑस्टिन ने सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों को बताया कि वे अमेरिका और भारतीय साझा सैन्य हितों के सहयोग के लिए प्रयास करेंगे।

उन्होंने सदस्यों को बताया कि वे पाकिस्तान से साफ तौर पर कहेंगे कि वह हिंसक चरमपंथी संगठनों और आतंकवादियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोके।

कार्रवाई न करने पर जताई नाराजगी
उन्होंने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर पाकिस्तान के प्रति गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी आतंकी संगठनों लश्कर और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ पाकिस्तान सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया है।

पाक को बदलना होगा रवैया
ऑस्टिन ने कहा कि 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद आतंकी हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि पाकिस्तान आतंकियों पर लगाम लगाने में मदद नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा और आतंकियों पर नकेल कसनी होगी। हमें आतंकियों के साथ नरम रवैया की नीति मंजूर नहीं है।

उन्होंने भविष्य में भी भारत के साथ रक्षा सहयोग जारी रखने का एलान करते हुए कहा कि हम क्वाड के जरिए रक्षा सहयोग के दायरे को और बढ़ाने की कोशिश करेंगे। क्वाड में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भारत भी शामिल है।

विदेश मंत्री का सहयोग जारी रखने का संकेत
अमेरिका के नामित विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने भी भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नीति जारी रखने का संकेत दिया है। ब्लिंकन ने सीनेट की विदेशी मामलों की समिति के सामने रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति का समर्थन किया।

चार घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस बैठक में उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग की नीति क्लिंटन प्रशासन के आखिरी दिनों में शुरू हुई थी। ओबामा प्रशासन के दौर में रक्षा खरीद और सूचना साझेदारी में सहयोग बढ़ा। ट्रंप प्रशासन ने इसे आगे बढ़ाकर हिंद प्रशांत सहयोग की रणनीति पर काम किया।

चीन की चुनौती का करेंगे सामना
उन्होंने कहा कि इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि एक राष्ट्र के तौर पर हमारे हितों को सबसे अधिक चुनौती चीन की ओर से पेश की जा रही है। अमेरिका को इस चुनौती का सामना करना है और हम पूरी मजबूती से इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि चीन समेत कोई भी देश भारतीय संप्रभुता को चुनौती न दे सके। आतंक के मुद्दे पर भी हम भारत के साथ हैं। दोनों देशों के आपसी रिश्तो को मजबूत बनाने के लिए बहुत सारे रास्ते हैं और हम निश्चित रूप से भारत के साथ दोस्ती का रुख बनाए रखेंगे।


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