क्या गांजे को करे दें लीगल, जनता से पूछा गया सवाल

क्या गांजे को करे दें लीगल, जनता से पूछा गया सवाल

पूरे यूरोप में फ़्रांस में गांजे (कैनाबिस) के खिलाफ सबसे सख्त कानून हैं। इसके बावजूद पूरे यूरोप में फ़्रांस में सबसे ज्यादा गांजे का उपभोग होता है। गांजा-भांग पर कानून के डंडे से रोक लगा पाने में असफल रहने पर अब फ़्रांस के सभी दलों के सांसदों ने इस मसले पर जनता की राय लेने का अभियान चलाया है।

गांजे को लीगल करने पर विचार
फ़्रांस के ढेरों सांसदों का मानना है कि देश के राजनीतिक वर्ग को गांजे को लीगल करने के बारे में सोचना चाहिए। इसी मंशा के चलते फ़्रांस की नेशनल असेम्बली की वेबसाइट पर 13 जनवरी को जनता की राय मांगने का कंसल्टेशन पेपर जारी किया गया। देखते देखते पौने दो लाख लोगों ने अपनी राय वेबसाइट पर डाल भी दी। आमतौर पर ऐसी रायशुमारी में औसतन 30 हजार जवाब ही आते हैं।

गांजा लीगल किया जाये कि नहीं इस पर जनता की राय 28 फरवरी तक ली जायेगी। इस रायशुमारी के दो मकसद हैं – ये जानना कि फ्रेंच नागरिकों के गांजे के बारे में क्या विचार हैं और लोग गांजा-भांग पर किस तरह की सरकारी पॉलिसी चाहते हैं। लोगों की क्या राय है इसे अप्रैल में प्रकाशित किया जाएगा।

फ्रेंच प्रेसिडेंट इमानुएल माक्रों की पार्टी की सांसद कैरलाइन जनिविएर का कहना है कि जनता की राय जानने से हमें बहुत फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जनता की राय पता करके शायद इस बात की पुष्टि हो सकेगी कि फ़्रांस का राजनीतिक वर्ग मजे के लिए कैनाबिस के इस्तेमाल के प्रति काफी कम सहानुभूति वाला रुख रखता है, जबकि जनता का रुख इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि हर साल फ़्रांस 568 मिलियन यूरो गांजे की तस्करी रोकने पर खर्च करता है। इसको देखने की जरूरत है।

फ़्रांस की सरकारों ने हमेशा ही गांजे को अपराध की श्रेणी से बाहर लाने की मजबूत खिलाफत की है। 2019 में जब प्रधानमंत्री कार्यालय के आर्थिक सलाहकार ग्रुप ने ‘नशाबंदी पर असफलता’ की रिपोर्ट प्रकाशित की और गांजे को कानूनी वैधता देने का प्रस्ताव किया तो सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दिखाई। हेल्थ मिनिस्टर एग्नेस बुज्य्न ने सार्वजानिक तौर पर कहा कि वे गांजे के खिलाफ हैं। सितम्बर 2020 में आन्तरिक मंत्री गेराल्ड दर्मनिन ने कफा था कि हम इसे लीगल करने नहीं जा रहे।

यहां होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल
पूरे यूरोप में फ़्रांस ही ऐसा देश है जहाँ गांजा सबसे ज्यादा उपभोग किया जाता है। 2016 में 15 से 64 वर्ष के फ्रेंच नागरिकों में से 41 फीसदी ने कम से कम एक बार गांजा जरूर पिया था। यूरोप में ये आंकड़ा 18.9 फीसदी का है।


FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, इमरान सरकार को लगा बड़ा झटका!

FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, इमरान सरकार को लगा बड़ा झटका!

नई दिल्ली: आर्थिक तंगी झेल रही पाकिस्तान की इमरान सरकार की दिक्कतें कम होती नहीं दिख रही हैं। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से पाकिस्तान को फिर कोई राहत नहीं मिली है। आतंकियों पर कार्रवाई करने में विफल पाकिस्तान को एफएटीएफ ने जून तक के लिए अपनी ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 27 सूत्रीय कारवाई योजना को पूरी तरह लागू करने का कड़ा निर्देश भी दिया है। पाकिस्तान ने एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिश में जुटा हुआ था मगर संगठन की ओर से की गई इस कार्रवाई से पाकिस्तान को करारा झटका लगा है।

आतंकियों के खिलाफ करनी होगी कार्रवाई
एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया था और उसके बाद से पाकिस्तान लगातार ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिश में जुटा हुआ है मगर वह एफएटीएफ को संतुष्ट करने में नाकाम रहा है।

एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्यलेर ने कहा कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की चिंताओं को जल्द से जल्द दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दी गई समय सीमा पहले ही खत्म हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने 27 में से 24 बिंदुओं पर कार्रवाई पूरी कर ली है मगर संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से सूचीबद्ध आतंकियों और उनके मददगार उनके खिलाफ कार्रवाई की दिशा में भी ठोस कदम उठाना होगा।

पाक ने नहीं उठाए पर्याप्त कदम
एफएटीएफ का साफ तौर पर कहना है कि अभी आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने में पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं है और इनमें गंभीर खामियां हैं। पाकिस्तान की अदालतों को आतंकवाद में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की दिशा में कदम उठाना होगा।

रोकनी होगी आतंकियों को मदद
एफएटीएफ का कहना है कि पाकिस्तान को तीन अधूरे कार्यों को पूरा करना होगा तभी वह ग्रे लिस्ट से बाहर आने में कामयाब हो सकता है। संगठन की जून में होने वाली अगली बैठक में पाकिस्तान के मौजूदा दर्जे पर फिर से फैसला किया जाएगा।

पाकिस्तान को ऐसे आतंकियों और उनके मददगारों पर प्रभावी व ठोस कार्रवाई करनी होगी जो संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नामित हैं। इसके साथ ही उसे आतंकी फंडिंग की समस्या से निपटने के लिए एक प्रभावी प्रणाली भी बनानी होगी।

संगठन का कहना है कि यदि पाकिस्तान ने तीन अधूरे कार्यों को पूरा करने में कामयाबी हासिल की तो जून में होने वाली अगली बैठक में उसके कदमों की समीक्षा के बाद अगला फैसला किया जाएगा।


आतंकी की रिहाई पर तीखी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने हाल में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के मुख्य आरोपी आतंकी उमर सईद शेख को बरी कर दिया था। पर्ल की 2002 में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी।

उमर सईद शेख को बरी करने पर अंतरराष्ट्रीय जगत ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। अमेरिका ने पाकिस्तान की अदालत के इस फैसले पर गुस्सा जताते हुए पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई थी। दुनिया के कई अन्य देशों ने भी इस कदम पर नाराजगी जताई थी।

नहीं पूरा हो सका पाकिस्तान का सपना
पाकिस्तान इस बार और तुर्की और चीन की मदद से ग्रे लिस्ट से बाहर आने का सपना देख रहा था मगर पाकिस्तान का यह सपना पूरा नहीं हो सका है। पाकिस्तान जून 2018 से ही ग्रे लिस्ट में बना हुआ है।

इसके बाद हुई एफएटीएफ की कई बैठकों में उसने ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिश की है मगर अभी तक उसे कामयाबी नहीं मिल सकी है।

आतंकियों की मदद करता है पाक
एफएटीएफ की ओर से पाकिस्तान को पिछले साल अक्टूबर में सभी 28 बिंदुओं को लागू करने के लिए कहा गया था मगर पाकिस्तान अभी तक सभी बिंदुओं पर कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।

पाकिस्तान दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करता है मगर पिछले दरवाजे से आतंकियों की मदद भी करता रहा है। जम्मू-कश्मीर में हुई कई आतंकी घटनाओं में पाकिस्तान और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से मदद दिए जाने की पुष्टि भी हो चुकी है।


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