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इस्लाम के खिलाफ संघर्ष का ऐलान करने वाले सलवान मोमिका की नॉर्वे में हुई मौत

एक चौंकाने वाली समाचार में, इराकी शरणार्थी और इस्लाम आलोचक सलवान सबा मैटी मोमिका कथित तौर पर नॉर्वे में मृत पाए गए. मोमिका को स्वीडन में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए जाना जाता था जहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से कुरान को जलाया था. स्वीडन में कुरान जलाकर लाखों लोगों को नाराज करने वाले सलवान मोमिका की नॉर्वे में मृत्यु होने का दावा किया गया है. कुछ दिन पहले, सलवान मोमिका ने स्वीडिश ऑफिसरों द्वारा जारी निर्वासन आदेश के बाद पड़ोसी नॉर्वे में शरण लेने के अपने इरादे का खुलासा किया था. 37 वर्षीय मोमिका ने इस्लाम की पवित्र पुस्तक के विरुद्ध अपने उत्तेजक कार्यों के लिए कुख्याति प्राप्त की, जिससे विभिन्न मुस्लिम-बहुल राष्ट्रों में आक्रोश और अशांति फैल गई.

स्वीडन में  कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की मौत

पिछले वर्ष जून में सलवान ने आज़ादी के नाम पर स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम की सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान की एक प्रति जला दी थी. उसके एक दोस्त ने इस हरकत का वीडियो भी बना लिया. हालाँकि, स्वीडन सहित पूरे विश्व में कई जगहों पर सलवान के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन हुए और उन्हें इस तरह की हरकत करने की इजाजत देने के लिए मुसलमान राष्ट्रों द्वारा स्वीडिश गवर्नमेंट की भारी निंदा भी की गई.

सलवान मोमिका को 2021 में स्वीडिश गवर्नमेंट ने शरण दी थी?

सलवान मोमिका को 2021 में स्वीडिश गवर्नमेंट ने अपने राष्ट्र में शरण दी थी. इससे पहले सलवान 2018 में इराक से भाग गया था. इराक में उन्होंने एक सशस्त्र समूह का नेतृत्व किया. स्वयंभू नास्तिक साल्वन ने स्वीडन में कई बार इस्लाम के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया है.

कुरान जलाने के बाद स्वीडन छोड़कर नॉर्वे चले गये सलवान 

हालाँकि, कुरान की प्रति जलाने की घटना के बाद वह स्वीडन छोड़कर नॉर्वे चले गये. अब एक मीडिया रिपोर्ट में बोला गया है कि 37 वर्ष के एक शख्स की मृत्यु हो गई है और उसका नाम सलवान मोमिका कहा जा रहा है इसके बाद मंगलवार को यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा में रही. नॉर्वेजियन ऑफिसरों ने इस मीडिया रिपोर्ट का न तो समर्थन किया है और न ही खंडन किया है. इस बीच, उनकी मृत्यु की समाचार देने वाले रेडियो जेनोआ ने बाद में सोशल मीडिया से उनसे जुड़ी पोस्ट हटा दी.

रेडियो जेनोआ ने मंगलवार को कहा कि 37 वर्षीय आदमी मृत पाया गया है. हालाँकि, बाद में एकाउंट ने आगे की पुष्टि के लिए ट्वीट को हटा दिया मोमिका ने इराक लौटने पर अपने जीवन को खतरा होने की संभावना व्यक्त की थी, जिसके कारण उनके अस्थायी निवास परमिट को 16 अप्रैल, 2024 तक बढ़ा दिया गया था.

इस्लाम के विरुद्ध विरोध का किया ऐलान

स्वीडिश टैब्लॉइड एक्सप्रेसन के साथ एक इंटरव्यू में, मोमिका ने स्वीडन की शरण नीतियों की निंदा करते हुए नॉर्वे में स्थानांतरित होने का अपना फैसला व्यक्त किया था. उन्होंने कहा, “स्वीडन सिर्फ़ उन आतंकियों को स्वीकार करता है जिन्हें शरण दी जाती है और सुरक्षा दी जाती है, जबकि दार्शनिकों और विचारकों को निष्कासित कर दिया जाता है. पिछले हफ़्ते उन्होंने घोषणा की थी कि उन्होंने स्वीडन छोड़ दिया है और नॉर्वे में शरण ले ली है.

उन्होंने बोला था कि “आज मैंने स्वीडन छोड़ दिया और अब नॉर्वेजियन ऑफिसरों के संरक्षण में नॉर्वे में हूं. मैंने नॉर्वे में शरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवेदन किया है क्योंकि स्वीडन दार्शनिकों और विचारकों के लिए शरण स्वीकार नहीं करता है, बल्कि सिर्फ़ आतंकियों के लिए शरण स्वीकार करता है. मेरा प्यार और सम्मान स्वीडिश लोग वैसे ही रहेंगे, लेकिन स्वीडिश ऑफिसरों द्वारा मुझ पर जो उत्पीड़न किया गया, वह स्वीडन का अगुवाई नहीं करता है. मैं इस्लामी विचारधारा के विरुद्ध अपना संघर्ष जारी रखूंगा. जब से मैंने इस्लाम के विरुद्ध संघर्ष प्रारम्भ किया है, मैंने इसकी मूल्य चुकाई है और चुकाऊंगा , और मैं इसके लिए तैयार हूं, चाहे जो भी मूल्य चुकानी पड़े.

मोमिका के कुरान जलाने ने, जिसने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, जातीय समूहों के विरुद्ध उकसाने के लिए स्वीडिश ऑफिसरों द्वारा जांच की गई. उनके कार्यों ने स्वीडन की नाटो सदस्यता में देरी करने में भी किरदार निभाई, विशेष रूप से नाटो सदस्य तुर्की की नाराजगी झेलनी पड़ी. मोमिका ने इराक लौटने पर अपने जीवन को खतरा होने की संभावना व्यक्त की थी, जिसके कारण उनके अस्थायी निवास परमिट को 16 अप्रैल, 2024 तक बढ़ा दिया गया था.

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