बिना जिम जाए इन सरल उपायों से स्वयं को फिट रखती हैं ये 56 वर्ष की अदाकारा , 19 वर्ष के बेटे की हैं मां

बिना जिम जाए इन सरल उपायों से स्वयं को फिट रखती हैं ये 56 वर्ष की अदाकारा , 19 वर्ष के बेटे की हैं मां

ये कहावत बहुत आम है और आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) अक्सर ही ये कहते आए हैं कि ‘Age just a number’, क्योंकि वे 40 वर्ष में भी एक युवा की तरह दिखते हैं. बहरहाल, यहां हम बात कर रहे हैं एक ऐसी अदाकारा के बारे में, जो आयु में भले ही 56 की हों लेकिन बॉडी से नहीं. जी हां, आप 56 वर्ष की हॉलीवुड अदाकारा एलिजाबेथ हर्ले को देख कहीं से भी नहीं कह सकेंगे कि वे इतनी एज की होंगी. एक मॉडल और अदाकारा जो स्टाइल स्टेटमेंट को बनाए रखना हमेशा जारी रखती है और फैशन में बहुत बढ़िया बनी रहती है, हर्ले स्वयं भी इसकी उदाहरण है. हर्ले 19 वर्ष के बेटे की मां हैं लेकिन दिखने में वे स्वयं भी बहुत ज्यादा यंग लगती हैं. उनकी फिटनेस को देख लोग दंग हैं और उनसे फिटनेस की प्रेरणा ले रहे हैं. हर्ले चर्चा में तब आईं, जब उन्होंने अपनी उस ड्रेस को पहना जिसे उन्होंने 1994 में पहना था. दशकों गुजर जाने के बाद भी वे अपनी इस ओल्ड ड्रेस में एक दम वैसी ही दिखीं, जैसे कि वे 1994 में नजर आई थीं. आइए, जानते हैं हर्ले की फिटनेस का क्या है राज

हॉलीवुड अदाकारा एलिजाबेथ हर्ले 56 वर्ष की हैं जो कि एक 19 वर्ष के बच्चे की मां भी हैं. लेकिन उनकी फिटनेस को देख हर कोई दंग है. बिना जिम के भी वे स्वयं को मेंटेन रखती हैं.



ये कहावत बहुत आम है और आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) अक्सर ही ये कहते आए हैं कि ‘Age just a number’, क्योंकि वे 40 वर्ष में भी एक युवा की तरह दिखते हैं. बहरहाल, यहां हम बात कर रहे हैं एक ऐसी अदाकारा के बारे में, जो आयु में भले ही 56 की हों लेकिन बॉडी से नहीं. जी हां, आप 56 वर्ष की हॉलीवुड अदाकारा एलिजाबेथ हर्ले को देख कहीं से भी नहीं कह सकेंगे कि वे इतनी एज की होंगी. एक मॉडल और अदाकारा जो स्टाइल स्टेटमेंट को बनाए रखना हमेशा जारी रखती है और फैशन में बहुत बढ़िया बनी रहती है, हर्ले स्वयं भी इसकी उदाहरण है.

हर्ले 19 वर्ष के बेटे की मां हैं लेकिन दिखने में वे स्वयं भी बहुत ज्यादा यंग लगती हैं. उनकी फिटनेस को देख लोग दंग हैं और उनसे फिटनेस की प्रेरणा ले रहे हैं. हर्ले चर्चा में तब आईं, जब उन्होंने अपनी उस ड्रेस को पहना जिसे उन्होंने 1994 में पहना था. दशकों गुजर जाने के बाद भी वे अपनी इस ओल्ड ड्रेस में एक दम वैसी ही दिखीं, जैसे कि वे 1994 में नजर आई थीं. आइए, जानते हैं हर्ले की फिटनेस का क्या है राज



​हर्ले का वर्कआउट

अदाकारा को मॉर्निंग वर्कआउट बहुत ज्यादा पसंद है, वे अपने दिन की आरंभ किसी न किसी तरह के व्यायाम से करती हैं. सूत्रों के अनुसार, प्रसिद्ध मॉडल अपने दिन की आरंभ कुछ स्क्वाट से करती हैं. हर्ले योग और पिलेट्स को करना भी पसंद करती हैं, वे हाई इंपेक्ट और स्पोर्टी वर्कआउट स्टाइल्स को प्रायोरिटी देती हैं.

चूंकि हर्ले आउटडोर वर्कआउट और नॉन-जिम अभ्यास की भी बहुत बड़ी प्रशंसक हैं, इसलिए वे अपनी हार्ट बीट बढ़ाती हैंऔर अपने डॉग्स के साथ 20 मिनट की सैर पर जाती हैं. हर्ले यह भी सुनिश्चित करती है कि वह एक दिन में 10-12,000 स्टेप्स चलें, चाहे उसका शेड्यूल कितना भी व्यस्त या मुश्किल क्यों न हो. वह सक्रिय रहने और हर कदम पर चलने में विश्वास करती हैं. अदाकारा कहती हैं कि वॉक करना नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि पैदल चलना कुछ कार्डियो करने का एक बहुत बढ़िया ऑप्शन है और फिट रहने का सबसे सरल उपाय है.


क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

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कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

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खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है