सुबह उठते ही Diabetes वाले खाएं 2 भीगे हुए अखरोट, शुगर लेवल नेचुरली हो जाएगा कम

सुबह उठते ही Diabetes वाले खाएं 2 भीगे हुए अखरोट, शुगर लेवल नेचुरली हो जाएगा कम

जब भी बात स्वास्थ्य को बेहतर करने की आती है, तो इनमें सबसे पहले नाम आता है ड्राई फ्रूट्स का. ड्राई फ्रूट्स और सीड्स ऐसी खाद्य सामग्री है जिनके जरिए ना केवल आपको बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं. बल्कि यह आपको पूरे समय ऊर्जावान भी रखते हैं. इन्हीं ड्राई फ्रूट्स में सबसे खास हैं वह हैं अखरोट, इन्हें ब्रेन फूड भी बोला जाता है. लेकिन केवल मस्तिष्क ही नहीं बल्कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए यह लाभकारी है, ऐसा हम नहीं बल्कि कुछ रिसर्च कहती हैं. वहीं रिसर्च का यह तक बोलना है कि डायबिटीज जैसे रोग को मैनेज करने में भी अखरोट का सेवन लाभदायक होता है. इसके लिए आपको अखरोट को भिगोकर खाना चाहिए. आइए जानते हैं आखिर किस तरह भीगे हुए अखरोट आपकी डायबिटीज को मैनेज कर सकते हैं.

क्या आपको डायबिटीज का रोग है और आप इसे मैनेज करने का उपाय खोज रहे हैं. यदि हां तो भीगे हुए अखरोट का सेवन कर सकते हैं. आइए जानते हैं किस तरह डायबिटीज को मैनेज करने में कार्य आ सकते हैं भीगे हुए अखरोट.



जब भी बात स्वास्थ्य को बेहतर करने की आती है, तो इनमें सबसे पहले नाम आता है ड्राई फ्रूट्स का. ड्राई फ्रूट्स और सीड्स ऐसी खाद्य सामग्री है जिनके जरिए ना केवल आपको बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं. बल्कि यह आपको पूरे समय ऊर्जावान भी रखते हैं. इन्हीं ड्राई फ्रूट्स में सबसे खास हैं वह हैं अखरोट, इन्हें ब्रेन फूड भी बोला जाता है.

लेकिन केवल मस्तिष्क ही नहीं बल्कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए यह लाभकारी है, ऐसा हम नहीं बल्कि कुछ रिसर्च कहती हैं. वहीं रिसर्च का यह तक बोलना है कि डायबिटीज जैसे रोग को मैनेज करने में भी अखरोट का सेवन लाभदायक होता है. इसके लिए आपको अखरोट को भिगोकर खाना चाहिए. आइए जानते हैं आखिर किस तरह भीगे हुए अखरोट आपकी डायबिटीज को मैनेज कर सकते हैं.



​भीगे हुए अखरोट ज्‍यादा फायदेमंद

जानकारों के मुताबिक भीगे हुए अखरोट का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. ऐसा बोला जाता है कि ड्राई फ्रूट्स और सीड्स के अंदर कुछ ऐसे तत्व होते हैं जिन्हें कच्चा खाने पर पचाना मुश्किल हो जाता है. जबकि इन्हे भिगोकर खाने से शरीर इन्हें सरलता से पचा लेता है. साथ ही एक भ्रम जो लोगों के बीच है कि अखरोट को भिगोकर खाने से इसके पोषक तत्वों में परिवर्तन हो जाता है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें यह पूरी तरह असत्य है. भिगोकर रखने से इनमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं होता.



​भीगे हुए अखरोट डायबिटीज में फायदे

जानकारों के मुताबिक भीगे हुए अखरोट का प्रतिदिन सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित करना सरल हो जाता है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि इसके अंदर फाइबर होता है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखता है. जिसकी वजह से शुगर का स्पाइक नहीं होता. इसके अतिरिक्त अखरोट में केवल ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी केवल 15 ही होता है जो मधुमेह के रोगियो के लिए दोपहर के नाश्ते का एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसके अतिरिक्त भीगे हुए अखरोट इंसुलिन को भी बेहतर तरीका से कार्य करने में सहायता करता है.



​अखरोट के कुछ अन्य फायदे

डायबिटीज के अतिरिक्त अखरोट के फायदे स्वास्थ्य पर कई तरह से देखने को मिलते हैं. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि अखरोट के अंदर हेल्दी फैट जैसे ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, जिसकी वजह से दिल रोग मुक्त हो सकता है. इसके अतिरिक्त अखरोट में नेचुरल तेल भी होता है जो आपकी स्किन और बालों के लिए अच्छा होता है. यही नहीं नामी न्यूट्रिशनिस्ट नीलनंजाना सिंह के मुताबिक अखरोट के सेवन से सूजन को भी घटाया जा सकता और यह कैंसर के खतरे से भी बचा कर रखता है.



​'चिलियन अखरोट' दुनिया में सबसे बेहतरीन

चिली के राजदूत एच  जुआन अंगोलो के मुताबिक चिलियन अखरोट को दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है. इसकी वजह इनका हल्का रंग और लंबे समय तक ताजा रहना है. हाल ही में चिलियन अखरोट के उत्पादन को हिंदुस्तान में बढ़ाने के लिए एक कैंपेन भी चलाया जा रहा है. इसके बाद आशा की जा रही है कि लोग हिंदुस्तान में अखरोट का सेवन अधिक करने लगेंगे.


क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

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कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

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खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है