बिना कपड़ों के सोने से आपको मिलते हैं कई तरह के हेल्थ बेनिफिट्स

बिना कपड़ों के सोने से आपको मिलते हैं कई तरह के हेल्थ बेनिफिट्स

नेक्ड स्लीपिंग या बिना कपड़ों के सोने से आपको कई तरह के हेल्थ बेनिफिट्स मिल सकते हैं। इसके पीछे कोई साइंटिफिक डेटा नहीं है लेकिन डिफरेंट स्टडीज बताती हैं कि नेक्ड स्लीपिंग कई मायनों में मददगार साबित हो सकती है। मेल और फीमेल दोनों के लिए यह फायदेमंद है।

बिना कपड़ों के सोने से आपकी बॉडी का टेम्परेचर जल्दी नीचे गिरता है, जिससे दिमाग को सिग्नल मिलता है कि अब सोने का समय हो गया है। इससे आपको अच्छी और जल्दी नींद आती है। बॉडी टेम्परेचर के साथ ही अगर आप अपने रूम का टेम्परेचर भी सही रखेंगे तो आपकी स्लीपिंग और इम्प्रूव होगी।

न्यूड सोने से आपकी अपने पार्टनर के साथ भी इंटीमेसी बढ़ती है। दरअसल स्किन के कांटैक्ट से ऑक्सिटोसिन नाम का केमिकल रिलीज होता है। ऐसे में जब पार्टनर्स के साथ स्किन कांटैक्ट बढ़ता है तो ज्यादा मात्रा में ऑक्सिटोसिन प्रोड्यूस होता है जो आपको प्लीजिंग फीलिंग देता है। 

मेल इनफर्टिलिटी की समस्या भी नेक्ड सोने से कुछ हद तक खत्म हो सकती है। दरअसल कई बार पुरुष टाइट अंडरवियर पहनकर सोते हैं। ऐसे में स्क्रोटम का टेम्परेचर बढ़ जाता है, जिससे स्पर्म वाइटिलिटी और स्पर्म काउंट दोनों पर असर पड़ता है। यही बात फीमेल्स पर भी लागू होती है। अगर आपको नेक्ड सोना कंफर्टेबल नहीं लगता तो आप लाइट फिटिंग के कपड़े पहनकर भी सो सकते हैं।

अच्छी नींद से इम्यूनिटी बढ़ती है और इंफेक्शन के चांसेंस काफी कम हो जाते हैं। इसके उलट जब आप ठीक से सो नहीं पाते तो आपके शरीर की इम्यूनिटी दिन पर दिन घटती जाती है और आप चाहे कितना भी ध्यान रखें, बीमिरियों से बच नहीं पाते।


क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

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कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

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खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है