गर्मियों के मौसम में आलूबुखारा करें डायट में शामिल, कई बीमारियों से देता है राहत

गर्मियों के मौसम में आलूबुखारा करें डायट में शामिल, कई बीमारियों से देता है राहत

गर्मियों के मौसम में स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस मौसम में कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में बीमारियों से बचने व स्वस्थ रहने के लिए लोग अक्सर मौसमी फलों का सहारा लेते हैं। ऐसे में शरीर को प्राकृतिक रूप से कूल करने के लिए आलूबुखारा फल बेहद फायदेमंद है। औषधीय गुणों से भरपूर आलूबुखारा गर्मियों में अधिक मात्रा में खाया जाता है। इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। चलिए जानते हैं कि इसे खाने से आपको क्या-क्या फायदे होते हैं....

- अगर आपको खून की कमी के कारण एनीमिया रोग हो गया है तो इसे खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ता है और एनीमिया से बचाव होता है।

- विटामिन सी से भरपूर यह खट्टा-मीठा रफल खांसी-जुकाम को रोकने और गले में होने वाली समस्याओं से निजात पाने के लिए काफी प्रभावशाली है।

- गर्मी के मौसम स्‍वास्‍थ्‍य समस्याओं को दूर करने के लिए फालसे के रस का सेवन करना शरीर के लिए टॉनिक का काम करता है। यह पित्त की समस्याओं को दूर करता है और पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है।

- विटामिन सी और खनिज तत्वों से भरपूर फालसा के सेवन से ब्‍लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का लेवल कंट्रोल में रहता है।

- यूनिवर्सिटी इंस्‍टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी हेल्‍थ एंड सोसायटी द्वारा किए गए एक ताजा अध्‍ययन में पाया कि वजन और मोटापे से ग्रस्‍त लोगों ने 12 हफ्ते तक रोजाना सूखे प्‍लम खाकर लगभग 2 किलो वजन कम कर लिया था। प्‍लम ऊर्जा का बेहतर स्‍त्रोत हैं। ये देरी से पचते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते।  

- इसमें मौजूद हाई पोटेशियम से ब्‍लड प्रेशर रेगुलेट करने में मदद मिलती है। सौ ग्राम सूखे प्‍लम में 745 मिलिग्राम पोटेशियम पाया जाता है। अहमद टी और उनके सहयोगियों ने अपने एक अध्‍ययन में पाया कि सूखे प्‍लम को भिगोकर उसकी केवल एक खुराक खाने वाले मरीजों को ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद मिली थी।

- प्‍लम में हाई फाइबर होने की वजह से ये लीवर डिसऑर्डर के इलाज में भी सहायक हो सकता है। लीवर सेल्‍स डैमेज होने की वजह से लीवर एंजाइम का लेवल बढ़े लोगों पर एक अध्‍ययन किया गया। इन लोगों को तीन सूखे प्‍लम दिए, जिन्‍हें रातभर पानी में भिगोकर रखा गया था। आठ हफ्ते बाद ये परिणाम देखने को मिला कि इन लोगों को लीवर की बीमारियों में फायदा हो रहा था।

- सूखे प्‍लम कब्‍ज और खराब पाचन से पीड़ित लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्‍शन है। इतना ही नहीं ये बड़ी आंत में अच्छे बैक्‍टीरिया के विकास को बढ़ावा देकर पाचन में सहायक है। 

- सूखे प्‍लम बोरान का बेहतर स्‍त्रोत है जिससे हड्डियों के घनत्‍व में सुधार में मदद मिलती है। नेचुरल मेडिसीन जर्नल में प्रकाशित एक अध्‍ययन में पाया गया कि सूखे प्‍लम खाने से पुर बोन मिनरल डेनसिटी के रोगियों में बोन टर्नोवर मार्कर के सीरम का लेवल कम हो गया था।

- सूखे प्‍लम धमनियों को खत्‍म कर हार्ट डिजीज़ से बचाने में सहायक हैं। इसके अलावा हाई फाइबर होने की वजह से भी ये हार्ट डिजीज से बचाने में मददगार हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार, हाई फाइबर के सेवन से कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 12 फीसदी और कार्डीओवैस्क्यलर डिजीज़ का खतरा 11 फीसदी तक कम किया जा सकता है। 


क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

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कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

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खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है