माँ बनने की कोशिश कर रही है तो ना करें इस चीज का सेवन

माँ बनने की कोशिश कर रही है तो ना करें इस चीज का सेवन

कुछ चीजें प्रेग्नेंसी में खतरनाक होती है। करेले के सेवन से डायबिटीज में लाभ, वजन घटाने जैसे कई अन्य फायदे होते हैं। लेकिन यह हर किसी के लिए फायदेमंद हाे यह जरूरी नहीं। अाज हम अापकाे करेले के अधिक सेवन से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में अापने शायद ही सुना हाेगा।

करेले के अधिक सेवन के साइड इफेक्ट:

फर्टिलिटी: अगर अाप मां बनने की काेशिश कर रही हैं, ताे अापकाे करेले का सेवन करने से बचना चाहिए। इसमें मौजूद तत्व फर्टिलिटी संबंधित दवाओं का प्रभाव खत्म करने में सक्षम माने जाते हैं।

हाइपोग्लाइकेमिया कोमा: करेले का अधिक सेवन रक्त में शुगर के स्तर को इतना कम कर देता है कि इससे हाइपोग्लाइकोम‌िया कोमा नामक मानसिक समस्या भी पैदा हो सकती है।

लिवर व क‌िडनी: लिवर व किडनी के मरीजों के लिए भी करेले का अत्यधिक सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। यह लिवर में एन्जाइम्स के निर्माण को बढ़ाता है, जिससे लिवर प्रभावित होता है। 

हेमोलाइटिक अनीमिया: करेले के अत्याधिक सेवन से हेमोलाइट‌िक अनीमिया हो सकता है। इस स्थिति में पेट दर्द, सिर दर्द, बुखार या कोमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बच्चे के लिए: करेले के बीज के ऊपर का लाल खोल (रेड अरिल्स) टॉक्सिक हो सकता है। इसका सेवन करने से इन बच्चों को उल्टी और दस्त जैसी समस्या हो सकती है। 


कोविड होने के कितने दिन बाद तक बच्‍चों पर दें विशेष ध्‍यान

कोविड होने के कितने दिन बाद तक बच्‍चों पर दें विशेष ध्‍यान

नई दिल्‍ली कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर (Covid Third Wave) को लेकर लोगों में चिंता है वहीं कई वैज्ञानिकों के तीसरी लहर में बच्‍चों के कोविड प्रभावित होने की आसार जताने के बाद यह चिंता और भी ज्‍यादा बढ़ गई है ऐसे में कोविड और कोविड के बाद होने वाली रोंगों (Post Covid Disease) को लेकर भी सावधान रहना महत्वपूर्ण है

भारत में आई पहली और दूसरी लहर में कोविड-19 की चपेट में आए कुछ बच्‍चों में मल्‍टी सिस्‍टम इन्‍फ्लेमेट्री सिंड्रोम (multi system inflammatory syndrome) की रोग देखी गई है इसमें बच्‍चों के दिल, दिमाग, फेफड़ों, किडनी और लीवर पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है हिंदुस्तान के कई राज्‍यों में बच्‍चों में कोविड-19 से ठीक होने के बाद आकस्मित अन्‍य बीमारियां उभर आईं, जिसे लेकर जानकारों ने भी चिंता जाहिर की है

कोविड-19 के बाद पैदा हुई ये वे बीमारियां हैं जो पोस्‍ट कोविड इफैक्‍ट या लांग कोविड के रूप में बच्‍चों को लंबे समय तक परेशान करेंगी बच्‍चों में डायबिटीज और ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या भी सामने आई है ऐसे में कोविड-19 से बचाव के साथ ही स्‍वास्‍थ्‍य जानकार अभिभावकों को बच्‍चों को कोविड के बाद होने वाली रोंगों से बचाने की सलाह दे रहे हैं

ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक डाक्टर एमसी मिश्र कहते हैं कि बच्‍चों को कोविड-19 से बचाने के लिए उनकी सुरक्षा और कोविड-19 के नियमों का पालन सबसे ज्‍यादा महत्वपूर्ण है पहले तो बच्‍चों को कोविड-19 की चपेट में आने से बचाना है यदि बच्‍चों को कोविड-19 हो भी जाता है तो अभिभावकों को उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर नजर रखनी होगी ताक‍ि उन्‍हें पोस्‍ट कोविड होने वाली लाइफलांग रोंगों से बचाया जा सके
कोविड-19 होने के बाद इतने दिन तक रखें विशेष ध्‍यान

डाक्टर मिश्र कहते हैं कि बच्‍चों की स्वास्थ्य का ध्‍यान अभिभावकों को ही रखना होता है ऐसे में कोविड-19 से संक्रमित होकर ठीक हो गए बच्‍चों को लेकर लापरवाह नहीं होना है रोग ठीक होने के कम से कम दो से छह हफ्तों तक इनकी अच्‍छे से नज़र करनी है और किसी भी रोग के लक्षण उभरते हैं तो उसका चिकित्‍सकीय उपचार कराना है

डाक्टर कहते हैं कि मल्‍टी सिस्‍टम इन्‍फ्लेमेट्री सिंड्रोम (multi system inflammatory syndrome) के लक्षण कोविड-19 होने के दो से छह सप्ताह के भीतर दिखाई देने लगते हैं इनमें बीपी का बढ़ना घटना, लगातार बुखार, अंगों का लाल हो जाना, आंखों की सूजन आदि शामिल है ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें अन्यथा बच्‍चों के अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है उनके शारीरिक अंग बेकार हो सकते हैं

लिहाजा महत्वपूर्ण है कि कोविड-19 से बचाव के साथ ही कोविड-19 होने के बाद भी बच्‍चों की स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहा जाए और सावधानियां बरती जाएं यदि एक बार बच्‍चे के किसी अंग में कमी आ गई तो वह जीवनभर की कठिनाई पैदा कर सकती है ऐसे में बच्‍चों का विशेष ध्‍यान रखें


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