इस तरह से न खाएं ये सूखे मेवे, वर्ना स्वास्थ्य को होंगे भयंकर नुकसान; जानें एक्सपर्ट की राय

इस तरह से न खाएं ये सूखे मेवे, वर्ना स्वास्थ्य को होंगे भयंकर नुकसान; जानें एक्सपर्ट की राय

कोविड-19 वायरस महामारी (coronavirus pandemic) ने हम सभी को अपनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बना दिया है. अब हम सभी संतुलित आहार खाने के महत्व को अच्छी तरह से समझते हैं जिसमें फल, सब्जियां, स्वस्थ वसा और प्रोटीन शामिल हैं. ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनका ठीक ढंग से सेवन किया जाए तो वे शरीर के लिए करिश्मा ी साबित हो सकते हैं. इसके लिए हमें क्या खाना है, कब खाना है और कितना खाना है, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है. इसके अतिरिक्त आपको ये भी बता दें कि स्वस्थ भोजन की अधिकता भी शरीर पर प्रतिकूल असर डाल सकती है. जैसा कि आप जानते ही हैं कि अति हर वस्तु की ठीक नहीं है, फिर चाहे वो हेल्दी फूड ही क्यों न हों. कुछ ऐसे फूड जो सुपर हेल्दी हैं लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि इनका अधिक सेवन करने पर आपके स्वास्थ्य पर उल्टा असर पड़ सकता है. इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही सुपरफूड्स के बारे में बता रहे हैं जो बहुत हेल्दी हैं लेकिन अधिक खाने पर ये नुकसान भी पहुंचा सकते हैं…

वैसे तो ड्राई फ्रूट्स यानी सूखे मेवे हमारी स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं. लेकिन यदि आपने इन्हें अधिक मात्रा में खाया स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है.



कोविड-19 वायरस महामारी (coronavirus pandemic) ने हम सभी को अपनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बना दिया है. अब हम सभी संतुलित आहार खाने के महत्व को अच्छी तरह से समझते हैं जिसमें फल, सब्जियां, स्वस्थ वसा और प्रोटीन शामिल हैं. ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं जिनका ठीक ढंग से सेवन किया जाए तो वे शरीर के लिए करिश्मा ी साबित हो सकते हैं. इसके लिए हमें क्या खाना है, कब खाना है और कितना खाना है, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है. इसके अतिरिक्त आपको ये भी बता दें कि स्वस्थ भोजन की अधिकता भी शरीर पर प्रतिकूल असर डाल सकती है.

जैसा कि आप जानते ही हैं कि अति हर वस्तु की ठीक नहीं है, फिर चाहे वो हेल्दी फूड ही क्यों न हों. कुछ ऐसे फूड जो सुपर हेल्दी हैं लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि इनका अधिक सेवन करने पर आपके स्वास्थ्य पर उल्टा असर पड़ सकता है. इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही सुपरफूड्स के बारे में बता रहे हैं जो बहुत हेल्दी हैं लेकिन अधिक खाने पर ये नुकसान भी पहुंचा सकते हैं…



​सुपरफूड का आपको अधिक सेवन नहीं करना चाहिए

नट्स एक स्वस्थ आहार का एक अहम भाग हैं. बादाम, काजू और अखरोट स्वस्थ वसा, प्रोटीन और आवश्यक विटामिन से भरपूर होते हैं. ब्राजील के नट्स (Brazilian nuts) के बारे बोला जाता है कि यह सेलेनियम (selenium) से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी और रिप्रोडक्टिव सिस्टम यानी प्रजनन क्षमता के प्रॉपर फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण है. सेलेनियम, कोशिकाओं और ऊतकों को होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने में सहायता करता है. लेकिन बहुत अधिक ब्राजीलियाई नट्स आपके शरीर को अलावा सेलेनियम प्रदान कर सकते हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है.



​ब्राजील नट्स अधिक खाने से हो सकती हैं ये समस्याएं

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक (National Institute of Health), शरीर में बहुत अधिक सेलेनियम से मतली (nausea), दस्त (diarrhoea), स्कीन पर चकत्ते (skin rashes), मूड में उतार-चढ़ाव (mood fluctuations), बालों का झड़ना (hair loss), दांतों का रंग बदलना (discolouration of teeth) और तंत्रिका तंत्र (nervous system) की समस्याएं जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं. कुछ चरम मामलों में, यह दिल के दौरे, हार्ट फेलियर, कंपकंपी और सांस लेने में परेशानी का कारण भी बन सकता है.



​सेलेनियम का सेवन करना कितना सुरक्षित है?

बेंगलुरु के जीवोत्तम आयुर्वेद केन्द्र के डाक्टर शरद कुलकर्णी M.S (Ayu),(Ph.D.) ने बताया कि ब्राजील से आने वाले नट्स का यदि ठीक मात्रा में सेवन किया जाता है, तो इनके कई स्वास्थ्य फायदा होते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि केवल दो ब्राजीलियाई नट्स आपके लिए पर्याप्त हैं. वहीं एनएचएस के अनुसार, 19 से 64 साल की आयु के पुरुषों के लिए एक दिन में 75 ग्राम सेलेनियम का सेवन करना सुरक्षित है. इससे अधिक अमाउंट में खाने पर आपकी स्वास्थ्य पर हानिकारक दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं.



​ब्राजीलियन नट्स के फायदे

एक्सपर्ट बताते हैं कि ब्राजील के नट्स एंटीऑक्सिडेंट से भी भरपूर होते हैं, जो स्वास्थ्य और मस्तिष्क के काम के लिए बहुत अच्छा है. अध्ययनों के अनुसार, ये यौगिक लंबे समय में अवसाद को रोकने में सहायक होते हैं. उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोग भी सीमित मात्रा में ब्राजील के नट्स का आनंद ले सकते हैं. ब्राजील के नट्स में उपस्थित फास्फोरस और मैग्नीशियम, चिंता या अवसाद से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी होते हैं.


क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

- 

कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

- 

खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है