इन यौगिक क्रियाओं द्वारा बनाए अपने स्वास्थ को बेहतर

इन यौगिक क्रियाओं द्वारा बनाए अपने स्वास्थ को बेहतर

यह समय, समय का भरपूर फायदा उठाने का है. हमें आपने आपको शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सबल बनाना है. आम दिनों में तो आपको समय मिलता नहीं होगा मगर इन दिनों में समय की कमी तो नजर नहीं आती. 

हमारी ज़िंदगी का पूरा वजन मस्तिष्क पर है. यही हमारा एंटिना है. कुछ यौगिक क्रियाएं ऐसी हैं, जिनकी बदौलत हम दिमाग को सबल बना सकते हैं. हम ऐसे तीन यौगिक क्रियाओं की जानकारी आज आपको दे रहे हैं.

बुद्धि व धृति शक्ति विकासक 
आपस में पैर मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं, हाथ दोनों जांधों से सटे रहेंगे. शरीर में अकड़न नहीं होगी. इसे सम अवस्था कहते हैं. मुंह बंद रखें व सिर को पूरी तरह से पीछे की ओर झुकाएं. आंखें पूरी तरह से खुली रहेंगी. आसमान की ओर देखें. अपना ध्यान सिर के उस हिस्से पर लगाएं जहां पंडित लोग चोटी रखते हैं. उसे शिखामंडल कहते हैं. यहीं सहस्रार बिंदु होता है. नाक से सांस लें तो झटके से बाहर निकालो, जैसे लुहार की धोंकनी से आवाज आती है. इसे 20 से 25 बार करो. ऐसा होने कि सम्भावना है कि इसे करने के बाद आपको हल्का सा चक्कर आए, मगर घबराने की आवश्यकता नहीं है. इससे बुद्धि व धृति शक्ति बढ़ती है.
स्मरण शक्ति विकासक 
सम अवस्था में खड़े हो जाएं. पैरों से करीब डेढ़ कदम दूरी पर नीचे की ओर भूमि पर देखें. सामान्य कदम के हिसाब से गणना करें, लंबे या छोटे नहीं. भूमि पर नजर गड़ा लें. मुंह बंद रखें. अपना ध्यान सिर पर चोटी वाली स्थान लगाएं. ताकत लगाकर सांस लें व बाहर निकालें. झटका नहीं देना है मगर ताकत लगानी है. इसे 20 से 25 बार करें. इससे दिमागी थकान दूर होती है व याद्दाश्त बढ़ती है.

मेधा शक्ति विकासक 
सम अवस्था में खड़े हो जाएं. ठोडी को गले के निचले हिस्से यानी कंठकूप से लगाएं. आंखें बंद करें व ध्यान गर्दन के पिछले हिस्से यानी मेधाचक्र पर लगांए. जोर लगाकर सांस लें व ऐसे निकालें जैसे लोहार की धौंकनी से आवाज होती है. सांस लेने की भी आवाज होनी चाहिए. चार से पांच बार ऐसे करें. उसके बाद करीब 20 बार सांस वैसे ही छोड़ें जैसे ले रहे हैं. अब सांस झटके से नहीं मगर हां, जितनी गहराई से सांस ले रहे हैं उतनी ही गहराई से छोड़ें भी.