Benefits of Banana: जानिए केला आपके स्वास्थ्य के लिए कितने लाभकारी होता है

Benefits of Banana: जानिए केला आपके स्वास्थ्य के लिए कितने लाभकारी होता है

नई दिल्ली: Benefits of Banana: केला बाजारों की रौनक बढ़ाने वाला फल है. केला एक ऐसा फल है, जो हर स्थान सरलता से मौजूद हो जाता है. केले का पेड़ बहुत ज्यादा पवित्र माना जाता है और कई धार्मिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. केले का फल, फूल, पत्ते, तना, जड़ और डंडल इन छह चीजों का उपयोग होता है और इनके कई फायदे भी हैं. केले में मुख्यतः विटामिन-ए, विटामिन-सी, थायमीन, राइबो-फ्लेविन, नियासिन तथा खनिज तत्व होते हैं, जो रोंगों को ठीक करने में प्रभावी है.

केले की जड़ में एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटी-पायरेरिक गुण होते हैं. केले के फूल में फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और विटामिन ई होता है, जो आपकी स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होता है. आइए जानते हैं केले के फायदे के बारे में.

केले के फायदे

    • केले की जड़ को अस्थमा रोगियों, अल्सर के लिए, गैस्ट्रिक एसिड, स्कीन संबंधित समस्याओं, हाई ब्लड प्रेशर में लाभकारी माना जाता है.
    • केले के छिलके को चेहरे पर लगाने से स्कीन में निखार आता है. यह चेहरे के दाग-धब्बे मिटाता है.
    • केला आपको एनर्जी तो देती है, साथ ही यह वजन को भी कंट्रोल करता है प्रातः काल खाली पेट गर्म पानी के साथ केले का सेवन करने से वजन धीरे-धीरे कंट्रोल होने लगता है.
    • जो लोग सांस की रोग यानी दमे से पीड़ित है, उनके लिए भी केला फायदेमंद होता है. इसके लिए केले के छिलके सहित सीधा काटकर, उसमें नमक और कालीमिर्च मिलाकर रात भर चांदनी में रखना चाहिए और प्रातः काल इसे आग पर भूनकर खाने से दमे के मरीज को बहुत ज्यादा लाभ होता है.
    • केला ग्लूकोज से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है. इसमें 75 परसेंट जल होता है.
    • जुबान पर छाले हो जाने की स्थिति में गाय के दूध से बने दही के साथ केले का सेवन करना लाभदायक होता है. इससे छाले ठीक हो जाते हैं.
  • वजन बढ़ाने के लिए भी केला का इस्तेमाल रामबाण तरीका है. रोजाना यह पाव दूध के साथ दो पके केले का सेवन करने से वजन तेजी से बढ़ता है. लगभग एक महीने तक यह इस्तेमाल बहुत ज्यादा लाभप्रद होता है.

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

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कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

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खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है