बच्चें लेते हैं खर्राटे, तो हों सकती है ये बीमारी

बच्चें लेते हैं खर्राटे, तो हों सकती है ये बीमारी

लाइव हिंदी समाचार (हेल्थ कार्नर ) :-   क्या आपका बच्चा किसी भी बात को सीखने या नयी चीज को पहचानने में देर लगाता है या एकाग्रचित अथवा शांत न रहकर इधर-उधर  ज्यादा भटकाता है? सुबह-सुबह सिरदर्द या थकान की कम्पलेन करता है? उसे ठीक से नींद नहीं आती या फिर खाना निगलने में परेशानी महसूस करता है.

अगर ऐसी समस्याएं आपके बच्चे में नजर आ रही हों, तो सावधान हो जाएं. ये लक्षण बच्चों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नीया या ओएसए के हो सकते हैं. स्लीप एप्नीया बच्चों में खर्राटों की एक वजह है जिसमें गले या सांस की नली में रुकावट आने से फेफड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इसके अतिरिक्त भी कई कारण हैं जिनकी वजह से बच्चे खर्राटे लेते हैं.

2-8 वर्ष के बच्चों में परेशानी ज्यादा

कोलकाता के बेलव्यू हॉस्पिटल के ईएनटी जानकार डाक्टर उत्तम अग्रवाल के मुताबिक दो से आठ वर्ष की उम्र के लगभग 10 प्रतिशत बच्चे खर्राटे लेते हैं, इनमें से करीब 3-4 प्रतिशत स्लीप एप्नीया के शिकार होते हैं. इस रोग की जांच के लिए बच्चे की हैल्थ हिस्ट्री की बारीक जानकारी लेना महत्वपूर्ण है. साथ ही उसके सोने की आदतें, गर्दन के सॉफ्ट टीशूज का एक्सरे और फिजिकल चेकअप आदि महत्वपूर्ण होता है.

पांच कारणों से होती है यह दिक्कत

बाल रोग जानकार डाक्टर अशोक गुप्ता के मुताबिक बच्चों में खर्राटों की वजह टॉन्सिल या नाक के पिछले हिस्से में स्थित एडिनॉएड ग्रंथि का बढऩा है. कई बार जब बच्चों की नाक बंद होती है तो उन्हें मुंह से सांस लेनी पड़ती है, सांस की यही आवाज खर्राटे बन जाती है. इसके अतिरिक्त सांस की एलर्जी से भी बच्चों की नाक बंद हो जाती है जिससे खर्राटे आते हैं. यदि बच्चा थका हुआ होता है तो भी वह सोते हुए खर्राटे लेता है क्योंकि इस दौरान सांस नली की मांसपेशियां कमजोर होने से नली में रुकावट आ जाती है. नाक की हड्डी टेढ़ी होने पर भी बच्चों में खर्राटों की परेशानी हो जाती है.

मुंह बंद करना

अक्सर लोग बच्चे को खर्राटे लेता देख उसका मुंह बंद कर देते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि वह सांस लेने के लिए मुंह खोलकर सो रहा होता है, मुंह बंद करने पर उसका दम घुटेगा और वह नींद से जाग जाएगा.

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इलाज

खर्राटे लेने वाले बच्चों की नींद आमतौर पर पूरी नहीं होती जिस वजह से वे चिड़चिड़े हो जाते हैं और किसी भी में उनका मन नहीं लगता. इसलिए महत्वपूर्ण है कि बच्चे पर पडऩे वाले शारीरिक और मानसिक दबाव को दूर करें. एलर्जी की वजह से बच्चा खर्राटे लेता है तो नाक में डालने के लिए स्प्रे या ओरल दवाइयां दी जाती हैं. टॉन्सिल होने पर मेडिसिन दी जाती हैं, ठीक न होने पर ऑपरेशन किया जाता है. इसी तरह नाक की हड्डी बढऩे पर भी ऑपरेशन कराना पड़ता है.

आठ घंटे सोना जरूरी

एक सामान्य बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है कि वह आठ घंटे की नींद ले तभी वह पूरी तरह से फ्रेश होकर उठेगा.