इन छोटी-छोटी चीज़ों से करें फिटनेस की शुरुआत, रहेंगे लंबे समय तक हेल्दी और हैप्पी

इन छोटी-छोटी चीज़ों से करें फिटनेस की शुरुआत, रहेंगे लंबे समय तक हेल्दी और हैप्पी

फिटनेस के बारे में बात करते ही ज्यादातर लोगों का बहाना होता है क्या करें टाइम ही नहीं है। लेकिन ये वक्त तब हम आसानी से मैनेज कर लेते हैं जब किसी सेहत संबंधी समस्या का शिकार होते हैं। लेकिन ये गलत है, खुद को फिट रखने के लिए ऐसी चीज़ों का इतंजार क्यों करना? पूरे दिन में सिर्फ एक घंटा तो अपने लिए निकाला ही जा सकता है। हमारी सफलता कहीं न कहीं फिटनेस पर भी निर्भर करती है। यानी बेहतर जिंदगी के लिए फिटनेस जरूरी है, तो छोटी-छोटी चीज़ों से फिटनेस की शुरुआत करें, कुछ ऐसे...

लिफ्ट के बजाय सीढ़ियां

फिट रहने के लिए कई फ्लोर तक चढ़ने-उतरने के लिए सीढि़यों का प्रयोग करें। इससे पैरों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है। यहां तक कि मोटापा कम करने के लिए तमाम तरह की दूसरी एक्सरसाइज़ करने से बेहतर है दिन में कई बार सीढ़ियां चढ़ना-उतरना। इसके अलावा ये आपके हार्ट के लिए भी अच्छा रहेगा। तो सोचना क्या आज से ही करें इसकी शुरुआत।

लंच और डिनर के बाद वॉक

आधे घंटे के लंच ब्रेक में अगर 15 मिनट बचा लें तो वॉक की जा सकती है। अगर ब्रेकफास्ट हैवी करते हों तो लंच में सिर्फ दही, फ्रूट्स, वेजीटेबल्स या नट्स ले सकती हैं। इस समय का उपयोग वॉक के लिए किया जा सकता है। लंच के अलावा डिनर करने के बाद ही थोड़ा वक्त वॉक के लिए जरूर निकालें।

कॉमर्शियल ब्रेक

अगर शाम को टीवी पर फेवरेट प्रोग्राम देखते हैं तो उसके बीच में कॉमर्शियल ब्रेक का इस्तेमाल सिट अप्स, क्रंचेज व पुश अप्स के लिए कर सकते हैं। अगर इसमें भी आलस आ रहा है तो 2 से 3 मिनट तक की रनिंग ही अपनी जगह पर कर लें।सुबह को खुशगवार बनाएं

नींद में आधे घंटे की कटौती से सुबह खुशगवार हो सकती है। रात में समय पर सो जाती हैं तो सुबह जल्दी उठें। अगर छह बजे उठती हैं तो साढ़े पांच बजे उठ जाएं और इस आधे घंटे में वॉक या एक्सरसाइज करें। सुबह जल्दी नहीं उठ पातीं तो डिनर के बाद 30 मिनट की वॉक कर लें।

शॉपिंग के लिए कार क्यों

अक्सर लोग अपने लोकल मार्केट तक भी कार ड्राइव करके जाते हैं। अगर ज्यादा खरीदारी नहीं करनी है तो पैदल जाएं। इससे दो फायदे होंगे। ट्रैफिक कंट्रोल रहेगा और वॉक भी हो जाएगी। पास के पार्क में भी ड्राइव करके जाने से बेहतर यह है कि पैदल जाएं। 


कोविड होने के कितने दिन बाद तक बच्‍चों पर दें विशेष ध्‍यान

कोविड होने के कितने दिन बाद तक बच्‍चों पर दें विशेष ध्‍यान

नई दिल्‍ली कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर (Covid Third Wave) को लेकर लोगों में चिंता है वहीं कई वैज्ञानिकों के तीसरी लहर में बच्‍चों के कोविड प्रभावित होने की आसार जताने के बाद यह चिंता और भी ज्‍यादा बढ़ गई है ऐसे में कोविड और कोविड के बाद होने वाली रोंगों (Post Covid Disease) को लेकर भी सावधान रहना महत्वपूर्ण है

भारत में आई पहली और दूसरी लहर में कोविड-19 की चपेट में आए कुछ बच्‍चों में मल्‍टी सिस्‍टम इन्‍फ्लेमेट्री सिंड्रोम (multi system inflammatory syndrome) की रोग देखी गई है इसमें बच्‍चों के दिल, दिमाग, फेफड़ों, किडनी और लीवर पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है हिंदुस्तान के कई राज्‍यों में बच्‍चों में कोविड-19 से ठीक होने के बाद आकस्मित अन्‍य बीमारियां उभर आईं, जिसे लेकर जानकारों ने भी चिंता जाहिर की है

कोविड-19 के बाद पैदा हुई ये वे बीमारियां हैं जो पोस्‍ट कोविड इफैक्‍ट या लांग कोविड के रूप में बच्‍चों को लंबे समय तक परेशान करेंगी बच्‍चों में डायबिटीज और ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या भी सामने आई है ऐसे में कोविड-19 से बचाव के साथ ही स्‍वास्‍थ्‍य जानकार अभिभावकों को बच्‍चों को कोविड के बाद होने वाली रोंगों से बचाने की सलाह दे रहे हैं

ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक डाक्टर एमसी मिश्र कहते हैं कि बच्‍चों को कोविड-19 से बचाने के लिए उनकी सुरक्षा और कोविड-19 के नियमों का पालन सबसे ज्‍यादा महत्वपूर्ण है पहले तो बच्‍चों को कोविड-19 की चपेट में आने से बचाना है यदि बच्‍चों को कोविड-19 हो भी जाता है तो अभिभावकों को उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर नजर रखनी होगी ताक‍ि उन्‍हें पोस्‍ट कोविड होने वाली लाइफलांग रोंगों से बचाया जा सके
कोविड-19 होने के बाद इतने दिन तक रखें विशेष ध्‍यान

डाक्टर मिश्र कहते हैं कि बच्‍चों की स्वास्थ्य का ध्‍यान अभिभावकों को ही रखना होता है ऐसे में कोविड-19 से संक्रमित होकर ठीक हो गए बच्‍चों को लेकर लापरवाह नहीं होना है रोग ठीक होने के कम से कम दो से छह हफ्तों तक इनकी अच्‍छे से नज़र करनी है और किसी भी रोग के लक्षण उभरते हैं तो उसका चिकित्‍सकीय उपचार कराना है

डाक्टर कहते हैं कि मल्‍टी सिस्‍टम इन्‍फ्लेमेट्री सिंड्रोम (multi system inflammatory syndrome) के लक्षण कोविड-19 होने के दो से छह सप्ताह के भीतर दिखाई देने लगते हैं इनमें बीपी का बढ़ना घटना, लगातार बुखार, अंगों का लाल हो जाना, आंखों की सूजन आदि शामिल है ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें अन्यथा बच्‍चों के अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है उनके शारीरिक अंग बेकार हो सकते हैं

लिहाजा महत्वपूर्ण है कि कोविड-19 से बचाव के साथ ही कोविड-19 होने के बाद भी बच्‍चों की स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहा जाए और सावधानियां बरती जाएं यदि एक बार बच्‍चे के किसी अंग में कमी आ गई तो वह जीवनभर की कठिनाई पैदा कर सकती है ऐसे में बच्‍चों का विशेष ध्‍यान रखें


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