सायरा बानो को पहली नजर में हुआ था दिलीप कुमार से प्यार

सायरा बानो को पहली नजर में हुआ था दिलीप कुमार से प्यार

ट्रेजडी किंग नाम से मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार का 11 दिसंबर को जन्मदिन है। दिलीप कुमार पिछले काफी समय से फिल्मों से दूर हैं और बीमार भी। ऐसे में उनकी पत्नी सायरा ही उनका पूरा ख्याल रखती हैं। सायरा बानो स्वयं लोकप्रिय नायिका रही हैं और अपनी जंगली, अप्रैल फूल, पड़ोसन, झुक गया आसमान, पूरब और पश्चिम, विक्टोरिया नंबर 203, आदमी और इंसान तथा जमीर जैसी बहुत सी फिल्मों के लिए जानी जाती रही हैं। क्या आप जानते हैं दोनों की लव स्टोरी कैसे शुरू हुई। आइए दिलीप कुमार के जन्मदिन पर आपको बताते हैं दोनों की दिलचस्प लवस्टोरी।

 
सायरा बानो ने 1966 में 22 साल की उम्र में दिलीप कुमार से शादी की थी। उस समय दिलीप कुमार 44 साल के थे। सायरा और दिलीप कुमार की लव स्टोरी बहुत फेमस रही है। 12 साल की उम्र से सायरा दिलीप साहब को दीवानों की तरह चाहती थीं। जब ये चाहत दिलीप कुमार के सामने आई तब दिलीप कुमार को कुछ समझ नहीं आया क्योंकि दिलीप साहब उस वक्त किसी और के प्यार की गिरफ्त में थे।

 
दो बार प्यार में नाकामयाब रहे दिलीप सायरा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उम्र के फर्क के चलते भी दिलीप इस रिश्ते से कतरा रहे थे लेकिन वह इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि सायरा उनसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हैं। ये 1966 का साल था। दिलीप कुमार और सायरा बानो ने अपने मोहब्बत के एलान का फैसला कर लिया था। दिलीप कुमार पर वैसे तो देश-विदेश की कई लड़कियां जान छिड़कती थीं, लेकिन उन्हें सायरा बानो पसंद आईं। सायरा उनसे 22 साल छोटी थीं।

 
ये भी कहा जाता है कि कभी सायरा बानो का दिल राजेंद्र कुमार पर आया हुआ था और राजेंद्र पहले से शादीशुदा थे। ऐसे में सायरा की मां नसीम को यह बात पता चली तो उन्होंने पड़ोस में रहने वाले दिलीप से कहा कि वो सायरा को समझाए। दिलीप के समझाने पर सायरा ने कहा कि तो वो ही उनसे शादी क्यों नहीं कर लेते और फिर सायरा ने दिलीप कुमार से शादी कर ली।

 
दिलीप कुमार ने 1947 में आयी फिल्म 'जुगनू' से उन्होंने पहली बार सफलता का स्वाद चखा फिर उसके बाद उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिलीप कुमार ने देवदास, मुगल-ए-आजम जैसी फिल्मों में अपने शानदार अभिनय को पेश किया है। वह आखिरी बार 1998 में आई फिल्म 'किला' में नजर आए थे। दिलीप कुमार को 2015 में पद्म विभूषण से नवाजा गया था। उन्हें 1994 में दादासाहेब फाल्के अवार्ड भी मिल चुका है।