Royal Enfield के लवर्स को लगने वाला है बड़ा झटका!

Royal Enfield के लवर्स को लगने वाला है बड़ा झटका!

Royal Enfield के प्रेमियों के लिए वर्ष के पहले माह बुरी खबर लेकर आ गया है। कंपनी ने इस माह एक साथ अपनी तीन मोटरसाइकिलों के मूल्यों को बढ़ा दिया है। इनमें रॉयल एनफील्ड क्लासिक 350 से लेकर रॉयल एनफील्ड मेटेओर 350 और रॉयल एनफील्ड हिमालयन जैसी बाइक भी मौजूद है। आज हम आपको इन सभी बाइक्स की नई और पुराने मूल्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। 

Royal Enfield Classic 350: 3332 रुपये तक हुई महंगी: Royal Enfield ने इस माह अपनी लोकप्रिय बाइक Royal Enfield classic 350 के दाम को और भी बढ़ा दिया है। कंपनी ने जिसके मूल्य  में 2,002 रुपये से लेकर 3,332 रुपये तक की वृद्धि की गई है। मूल्यों  को अलग-अलग वैरिएंट पर अलग-अलग बढ़ाया जा चुका है। बढे हुए मूल्य के उपरांत अब इसकी शुरुआती दिल्ली एक्स-शोरूम  का मूल्य 1.87 लाख रुपये हो गया है, जो इसके टॉप एंड वैरिएंट पर 2.18 लाख रुपये तक जाती है।

Royal Enfield Meteor 350: 2752 रुपये तक हुई महंगी: Royal Enfield ने इस माह अपनी रॉयल एनफील्ड मेटेओर 350 के मूल्य को 2,511 रुपये से लेकर 2,752 रुपये तक बढ़ा दिया है। बढ़े हुए मूल्य अलग-अलग वैरिएंट्स पर अलग-अलग हैं। मूल्यों में बढ़ोतरी के उपरांत अब इसकी शुरुआती दिल्ली एक्स-शोरूम का मूल्य 2.02 लाख रुपये हो चुका है, जो इसके टॉप एंड वैरिएंट पर 2.20 लाख रुपये तक जा रहा है।

Royal Enfield Himalayan: 4253 रुपये तक हुई महंगी: Royal Enfield ने इस माहअपनी ऑफरोडिंग बाइक रॉयल एनफील्ड हिमालयन के मूल्यों में 4,103 रुपये से लेकर 4,253 रुपये तक की वृद्धि भी कर दी है। कंपनी की तरफ से अलग-अलग कलर ऑप्शन्स पर मूल्यों को अलग-अलग बढ़ा दिया है। बढ़ी कीमतों के उपरांत अब इसकी शुरुआती दिल्ली एक्स-शोरूम कीमत 2.15 लाख रुपये हो गई है, जो 2.23 लाख रुपये तक जाती है।


बायोगैस एसोसिएशन ने सरकार से ‘बायोगैस उर्वरक कोष’ बनाने का आग्रह किया

बायोगैस एसोसिएशन ने सरकार से ‘बायोगैस उर्वरक कोष’ बनाने का आग्रह किया

नयी दिल्ली। इंडियन बायोगैस एसोसिशन (आईबीए) ने सरकार से पांच साल के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये के आरंभिक प्रावधान के साथ ‘बायोगैस उर्वरक कोष’ स्थापित करने का अनुरोध किया है। संगठन ने कहा है कि इससे पांच करोड़ किसानों को लाभ पहुंचेगा तथा कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च भी कम होगा। आईबीए ने एक बयान में कहा कि किफायती परिवहन के लिए टिकाऊ विकल्प (एसएटीएटी) योजना के तहत पांच हजार संयंत्रों के लक्ष्य को पूरा करने में इस तरह के कोष की स्थापना स्वागत योग्य कदम होगा।

संगठन के अध्यक्ष ए आर शुक्ला ने कहा, ‘‘सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के बारे में लगातार बात कर रही है। इस योजना से पांच करोड़ किसानों को फायदा पहुंचेगा। यह कोष बनने पर भारत जीवाश्म ईंधन का आयात कम कर सकेगा और किसानों को भी जैविक उर्वरक मिल सकेगा।’’ बायोगैस एसोसिशन ने शहरों में गैस वितरण नेटवर्क और प्राकृतिक गैस पाइपलाइन में बायोमीथेन (सीबीजी) के मिश्रण के लिए मात्रा को परिभाषित करने का भी सुझाव दिया है।

उसने कहा कि पहले पांच साल के लिए 5 प्रतिशत का एक अस्थायी मिश्रण कोटा तय किया जा सकता है। उसके बाद 10 साल में इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जा सकता है। आईबीए ने कहा कि जीएसटी परिषद ने बायोगैस संयंत्र से संबंधित उपकरण और उनके पुर्जों पर जीएसटी की दर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने की घोषणा की जिससे बायोगैस के उत्पादकों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।