18 दिसंबर को GST काउंसिल की होने वाली मीटिंग में कंपेंसेशन का मामला बहुत ज्यादा गरम

18 दिसंबर को GST काउंसिल की होने वाली मीटिंग में कंपेंसेशन का मामला बहुत ज्यादा गरम

केन्द्र से GST कंपेंसेशन मिलने में आ रही दिक्कतों पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के वित्त मंत्री व उनके प्रतिनिधियों ने बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की. राज्यों ने अपनी समस्या के बारे में सीधे वित्त मंत्री को बताते हुए उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा है. इन राज्यों ने एक तरह से त्रहिमाम संदेश देते हुए बोला है कि उनकी माली हालत बहुत बेकार है. अगर केन्द्र ने उनके हिस्से के बराबर राशि की भरपाई जल्द नहीं की तो राज्यों को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा.

करीब एक हफ्ता पहले ही GST काउंसिल ने राज्यों को लेटर लिखा था. इसमें उन्हें बोला गया था कि GST संग्रह की स्थिति बेकार है व सरकार तत्काल कंपेंसेशन देने में असमर्थ है. बुधवार को सीतारमण के साथ मीटिंग में दिल्ली, पंजाब, पुडुचेरी व मध्य प्रदेश के वित्त मंत्रियों तथा केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

 

बुधवार को हुई इस मीटिंग के बाद पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने बताया, ‘राज्यों को अगस्त-सितंबर का भी कंपेंसेशन नहीं मिला है. 10 दिसंबर के बाद अक्टूबर-नवंबर की राशि की अदायगी का भी समय आ जाएगा. वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया है कि सरकार जल्द से जल्द राशि की अदायगी की व्यवस्था करेगी. सरकार ऐसा करने के लिए संवैधानिक तौर पर बाध्य है.

बैठक में भाग लेने पहुंचे राजस्थान के तकनीकी एजुकेशन और सूचना मंत्री सुभाष गर्ग ने बताया कि केन्द्र से भाग नहीं मिलने की वजह से उनके प्रदेश के सामने वित्तीय संकट पैदा होने लगी है. पूर्व में केरल व पश्चिम बंगाल भी ऐसा कह चुके हैं. हालांकि सीतारमण ने बाद में बताया कि उन्हें कुछ राज्यों के वित्त मंत्रियों की तरफ से एक ज्ञापन मिला है व वह उन्हें देख रही हैं.

 

राज्यों के इस तेवर को देखने के बाद स्पष्ट है कि 18 दिसंबर को GST काउंसिल की होने वाली मीटिंग में कंपेंसेशन का मामला बहुत ज्यादा गरम रहेगा. गौरतलब है कि काउंसिल की तरफ से 27 नवंबर को सभी राज्यों को लेटर लिखा गया है जिसमें कंपेंसेशन नहीं मिलने की वजहों को भी बताया गया है. लेटर के मुताबिक कंपेंसेशन सेस संग्रह की राशि बहुत ज्यादा घट गई है.

कांउसिल ने GST संग्रह के भी उम्मीद से कम होने की बात करते हुए आगामी मीटिंग में इसे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है.जीएसटी अधिनियम के मुताबिक राज्यों को हर साल कुल राजस्व संग्रह में 14 फीसद इजाफे की एक तरह से गारंटी दी गई है. इसके लिए साल 2015-16 को आधार साल माना गया है. इसके मुताबिक साल 2015-16 के बाद से हर साल राज्यों के राजस्व में 14 फीसद का इजाफा सुनिश्चित किया जाएगा.

 

जिस साल राज्यों को GST संग्रह में हिस्सेदारी इस निर्धारित मात्र से कम होगी उसकी भरपाई केन्द्र की तरफ से की जाएगी. इसके लिए लक्जरी आइटमों और कुछ अन्य सिन उत्पादों (शराब, सिगरेट आदि) पर कंपेंसेशन कर भी लगाया गया है. लेकिन हाल के महीनों में कारों की बिक्री के घटने के साथ ही देश में सिगरेट, शराब की बिक्री भी कम हुई है जिसका प्रभाव संग्रह पर हुआ है. यही वजह है कि राज्यों को कानून के मुताबिक कंपेंसेशन राजस्व नहीं मिल पा रहा है.