चिप संकट ने बढ़ाई ऑटो सेक्टर की मुश्किलें, फेस्टिव सीजन में डीलरों को भारी नुकसान का अंदेशा

चिप संकट ने बढ़ाई ऑटो सेक्टर की मुश्किलें, फेस्टिव सीजन में डीलरों को भारी नुकसान का अंदेशा

नई दिल्ली सेमीकंडक्टर (Semiconductor) के संकट के बीच ऑटोमेकर्स डीलरों को पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं इसके चलते इस फेस्टिव सीजन में डीलरों को भारी नुकसान होने का अंदेशा है वाहन डीलरों के संघों के महासंघ यानी फाडा (FADA) के अध्यक्ष विन्केश गुलाटी ने यह राय जताई है

गुलाटी ने कहा, ”चिप का संकट जारी है ऐसे में मैन्युफैक्चरर को प्रोडक्शन के मुद्दों से जूझना पड़ रहा है वे अपने डीलर पार्टनर को सप्लाई घटा रहे हैं 

डीलरों के पास रद्द हो रही हैं बुकिंग 
नवरात्रि के पहले दिन से वाहन डीलरों के लिए 42 दिन के व्यस्त सत्र की आरंभ हुई है  सप्लाई की कमी की वजह से डीलर अपने ग्राहकों को उनकी पसंद के वाहन की सप्लाई के लिए इन्तजार करने को लेकर भरोसा नहीं दिला पा रहे हैं कई मॉडलों की भारी मांग के बीच डीलरों के पास बुकिंग रद्द हो रही हैं वहीं डीलरों के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं होने की वजह से मौके पर खरीद में भी कमी आ रही है

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गुलाटी ने कहा, ”सेल्स के लिहाज से फेस्टिव सीजन हमारे लिए सबसे अधिक जरूरी होता है औसतन इन दो माह में हम अपनी सालाना सेल्स का 40 प्रतिशत हासिल करते हैं यह वह समय होता है जबकि हम शेष वर्ष के परिचालन के लिए कमाई और बचत कर पाते हैं इस वर्ष हमें पर्याप्त संख्या में वाहन नहीं मिल रहे ऐसे में हमें नुकसान का अंदेशा है 

तीन महीने तक हो चुकी है वेटिंग पीरियड 
उन्होंने बोला कि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में ज्यादातर मॉडलों के लिए वेटिंग पीरियड पूर्व के एक से तीन माह की तुलना में बहुत ज्यादा अधिक बढ़ चुकी है डीलरशिप पर वाहन नहीं होने से मौके पर सेल्स भी प्रभावित हुई है गुलाटी ने कहा, ”हमारे आंकड़ों के मुताबिक 50 से 60 फीसदी खरीदार पहले से बुकिंग कराते हैं वहीं शेष 40 फीसदी शोरूम पर आकर तत्काल वाहन खरीदते हैं लेकिन अभी हमारे लिए यह चैप्टर बंद है 

फेस्टिव सीजन में सेल्स 3 से 3.5 लाख यूनिट रहने का ही अनुमान 
पूरी स्थिति को बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण बताते हुए उन्होंने बोला कि यदि इन 42 दिन में उद्योग सामान्य सेल्स हासिल कर पाया, तो उसे बहुत ज्यादा भाग्यशाली माना जाएगा उन्होंने कहा, ”हमें बड़े नुकसान का अंदेशा है   फेस्टिव सीजन में हमारी खुदरा सेल्स 4 से 4.5 लाख यूनिट्स रहती है लेकिन इस बार इसके 3 से 3.5 लाख यूनिट रहने का ही अनुमान है यदि हम यह आंकड़ा भी हासिल कर पाए, तो बहुत ज्यादा भाग्यशाली होंगे 


Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla Inc (टेस्ला इंक) ने भारतीय मार्केट में एंट्री करने से पहले इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात करों को कम करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफिस से निवेदन किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया, टेस्ला ने कुछ भारतीय वाहन निर्माताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया. टेस्ला इस वर्ष हिंदुस्तान में आयातित कारों की बिक्री प्रारम्भ करना चाहती है. लेकिन उनका बोलना है कि हिंदुस्तान में कर दुनिया में सबसे अधिक हैं.


टेस्ला ने कर कटौती के लिए सबसे पहले जुलाई में निवेदन किया था. जिस पर देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई लोकल कंपनियों ने असहमति जताई थी. इनका बोलना है कि इस तरह के कदम से घरेलू मैन्युफेक्चरिंग में निवेश बाधित होगा. 

हिंदुस्तान में टेल्सा के नीति प्रमुख मनुज खुराना सहित कंपनी के ऑफिसरों ने पिछले महीने एक बंद दरवाजे की मीटिंग में कंपनी की मांगों को मोदी के ऑफिसरों के सामने रखा, और यह तर्क दिया कि कर बहुत अधिक हैं. इस चर्चा से परिचित चार सूत्रों ने यह बताया. 

तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.
एक सूत्र के अनुसार, मोदी के ऑफिस में मीटिंग के दौरान, टेस्ला ने बोला कि हिंदुस्तान में शुल्क संरचना देश में उसके कारोबार को "व्यवहार्य प्रस्ताव" नहीं बनाएगी.

हिंदुस्तान 40,000 US डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 60 फीसदी का आयात शुल्क और 40,000 US डॉलर से अधिक मूल्य वाले वाहनों पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है. विश्लेषकों ने बोला है कि इन दरों पर टेस्ला की कारें खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी और उनकी बिक्री को सीमित कर सकती हैं. 
तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.