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पर्सनल कंप्यूटर्स की सेल्स घटने से Lenovo को लगा बड़ा झटका

पर्सनल कंप्यूटर्स (PC) की डिमांड में गिरावट से चीन की Lenovo को बड़ा झटका लगा है. कंपनी का जून तिमाही में रेवेन्यू 24 फीसदी गिरा है. दुनिया की इस सबसे बड़ी PC मेकर को लगातार चार तिमाहियों से सेल्स में कमी का सामना करना पड़ रहा है. पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का प्रॉफिट 14 फीसदी कम रहा था.

लेनोवो का जून तिमाही में रेवेन्यू 12.9 अरब $ रहा. इसके बाद कंपनी का शेयर प्राइस छह फीसदी घटा है. कोविड-19 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स की सेल्स में काफी बढ़ोतरी हुई थी क्योंकि कस्टमर्स और कंपनियो ने रिमोट वर्क पर शिफ्ट होने के लिए बड़ी संख्या में PC खरीदे थे. हालांकि, पिछले साल इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी और इन्फ्लेशन बढ़ने से डिमांड घटने के कारण कंपनी के रेवेन्यू में कमी प्रारम्भ हुई थी. PC की डिमांड में रिकवरी की रफ्तार कमजोर है और बहुत से रिटेलर्स के पास बिना बिकी इनवेंटरी पड़ी है. इससे PC मेकर्स और उनके सप्लायर्स को प्रोडक्शन वॉल्यूम और रेट्स को एडजस्ट करना पड़ा है.

इस साल की पहली तिमाही में PC की ग्लोबल शिपमेंट्स में 29 फीसदी की कमी हुई थी. इससे Mac कंप्यूटर्स बनाने वाली अमेरिकी कंपनी Apple को बड़ा हानि हुआ था. बाजार रिसर्च फर्म IDC की रिपोर्ट में कहा गया था कि पहली तिमाही में PC की ग्लोबल शिपमेंट्स घटकर 5.69 करोड़ यूनिट्स की रही. यह पिछले साल की समान अवधि में 8.02 करोड़ थी. पिछले साल की आखिरी तिमाही में इन शिपमेंट्स में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 28.1 फीसदी की कमी हुई थी. पहली तिमाही में एपल की शिपमेंट्स सबसे अधिक लगभग 40.5 फीसदी घटी थी. Dell के लिए शिपमेंट्स में कमी 31 फीसदी की रही. इसके अतिरिक्त Lenovo, Asustek Computer और HP को भी पहली तिमाही में शिपमेंट्स में गिरावट का सामना करना पड़ा था.

एपल ने कहा था कि उसके Mac कंप्यूटर्स की बिक्री महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम की वजह से तेजी से बढ़ी थी. इसमें पहली तिमाही में वैल्यू के लिहाज से वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 29 फीसदी की कमी हुई है. IDC ने बोला था, “डिमांड में कमी से डिवाइसेज बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई चेन में परिवर्तन करने का मौका मिला है. बहुत सी कंपनियां चीन से बाहर प्रोडक्शन को बढ़ाने की आसार तलाश रही हैं.” बड़े राष्ट्रों की इकोनॉमी में स्लोडाउन की संभावना बरकरार है. कुछ बड़े बैकों में वित्तीय संकट और इन्फ्लेशन बढ़ने से ग्रोथ और इनवेस्टमेंट में रुकावट आ सकती है.

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