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भारत की रिटेल महंगाई जनवरी 2024 में घटकर आई 5.1% पर

भारत की रिटेल महंगाई जनवरी 2024 में घटकर 5.1% पर आ गई है. यह महंगाई का तीन महीने का निचला स्तर है. इससे पहले दिसंबर 2023 में महंगाई 5.69% रही थी. वहीं नवंबर में यह 5.55%, अक्टूबर में 4.87% और सिंतबर में 5.02% रही थी. खाने-पीने के सामान की कीमतें घटने से महंगाई घटी है.

 

दिसंबर की तुलना में जनवरी में सब्जियों की महंगाई में गिरावट देखने को मिली है. जनवरी में सब्जियों की महंगाई 27.6% से घटकर 27% पर आ गई. दूसरी ओर, ईंधन और बिजली की महंगाई -0.60% हो गई है, जो दिसंबर में -0.77% थी.

  • खाद्य महंगाई रेट 9.5% से घटकर 8.3% पर आ गई
  • ग्रामीण महंगाई रेट 5.93% से घटकर 5.34% पर आ गई
  • शहरी महंगाई रेट 5.46% से घटकर 4.92% पर आ गई

रिटेल महंगाई 4% पर रखने का टारगेट
RBI की महंगाई को लेकर रेंज 2%-6% है. आदर्श स्थिति में RBI चाहेगा कि रिटेल महंगाई 4% पर रहे.

महंगाई कैसे प्रभावित करती है?
महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है. उदाहरण के लिए यदि महंगाई रेट 6% है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य केवल 94 रुपए होगा. इसलिए महंगाई को देखते हुए ही निवेश करना चाहिए. नहीं तो आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी.

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है. यदि लोगों के पास पैसे अधिक होंगे तो वे अधिक चीजें खरीदेंगे. अधिक चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की मूल्य बढ़ेगी.

इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है. सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है. वहीं यदि डिमांड कम होगी और सप्लाई अधिक तो महंगाई कम होगी.

CPI से तय होती है महंगाई
एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल बाजार से सामान खरीदते हैं. इससे जुड़ी कीमतों में हुए परिवर्तन को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है. हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है.

कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मेन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अतिरिक्त कई अन्य चीजें भी होती हैं, जिनकी रिटेल महंगाई रेट तय करने में अहम किरदार होती है. करीब 300 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का दर तय होता है.

 

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