वित्त साल में अगर आपको खुलवाना है पीपीएफ खाता तो जरूर जाने यह परिवर्तन 

वित्त साल में अगर आपको खुलवाना है पीपीएफ खाता तो जरूर जाने यह परिवर्तन 

लॉन्ग टर्म में निवेश के लिए पीपीएफ एक लोकप्रिय विकल्प है. इसमें अच्छे ब्याज के साथ ही पैसा डूबने का भय भी नहीं रहता. पिछले वर्ष दिसंबर 2019 में इस स्कीम को व सुन्दर बनाने के लिए कुछ परिवर्तन किए गए हैं जिसमें कर्ज़ से संबंधित परिवर्तन सबसे जरूरी हैं.

 आप सरलता से अपने पीपीएफ पर कर्ज़ ले सकते हैं. इतना ही नहीं यहां से कर्ज़ लेने पर आपको व्यक्तिगत कर्ज़ से कार्य ब्याज देना होगा. हम आपको पीपीएफ पर कर्ज़ लेने के बारे में बता रहे हैं.

पीपीएफ से कर्ज़ कब ले सकते हैं?
आपने जिस वित्त साल में पीपीएफ खाता खुलवाया है, उस वित्त साल की समापन के एक वित्त साल बाद से लेकर पांचवें वित्त साल की समापन तक आप पीपीएफ से कर्ज़ लेने के हकदार हैं. अगर आपने जनवरी 2017 में पीपीएफ खाता खुलवाया है तो आप 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2022 तक कर्ज़ ले सकते हैं.


कितना कर्ज़ ले सकते हैं?
जिस वित्त साल में आप कर्ज़ का आवेदन दे रहे हैं, उस वित्त साल से अच्छा पहले के दो वित्त साल की समापन पर जो बैलेंस (मूलधन + ब्याज) होगा, उसका अधिकतम 25 प्रतिशत आप कर्ज़ ले सकते हैं. जैसे अगर आप मार्च 2020 में कर्ज़ लेना चाहते हैं तो 31 मार्च 2018 को आपके खाते में जो बैलेंस होगा, उसकी अधिकतम 25 प्रतिशत राशि आप कर्ज़ ले सकते हैं.


लोन का रिपेमेंट कैसे?
जिस महीने आपने कर्ज़ लिया है, उसके अगले महीने की आरंभ से 36 महीने के अंदर आपको कर्ज़ की राशि (मूलधन) या तो एकमुश्त या किस्तों में चुकानी होगी. मूलधन चुकाने के बाद अधिकतम दो मासिक किस्तों में आप ब्याज चुका सकते हैं. नए परिवर्तन के अनुसार कर्ज़ की राशि पर ब्याज उस दर से एक प्रतिशत अधिक चुकाना होगा जो ब्याज पीपीएफ स्कीम के तहत आपको मिल रहा है. यानी अगर आपको अपने निवेश पर 7.9 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है तो कर्ज़ पर चुकाए जाने वाले ब्याज की दर 8.9 प्रतिशत होगी. इस परिवर्तन के पहले कर्ज़ पर ब्याज की दर मिलने वाले ब्याज से दो प्रतिशत अधिक थी. यानी अब एक प्रतिशत का लाभ हो गया है.


समय से कर्ज़ का रिपेमेंट नहीं करने पर?
अगर आपने तय समय सीमा के अंदर कर्ज़ राशि (मूलधन) का भुगतान कर दिया, लेकिन उस पर ब्याज का भुगतान तय समय सीमा में नहीं किया तो ब्याज की राशि आपके पीपीएफ खाते से काट ली जाएगी. वहीं, अगर आप 36 महीने के अंदर कर्ज़ राशि (पूरी या आंशिक तौर पर) नहीं चुकाते हैं तो कर्ज़ की बकाया राशि पर ब्याज की दर मिलने वाले ब्याज से 6 प्रतिशत अधिक (यानी 7.9+6 प्रतिशत = 13.9 फीसदी) की दर से ब्याज देना होगा. इस स्थिति में भी ब्याज की राशि प्रत्येक वित्त साल के अंत में आपके पीपीएफ खाते से काट ली जाएगी.


पीपीएफ से कर्ज़ में ब्याज दर का फायदा
पीपीएफ से कर्ज़ पर व्यक्तिगत कर्ज़ की तुलना में कम ब्याज है. वैसे पीपीएफ पर 7.9 प्रतिशत ब्याज है, इसलिए पीपीएफ से कर्ज़ लेने पर एक प्रतिशत ज्यादा यानी 8.9 प्रतिशत ब्याज देना होगा, जबकि व्यक्तिगत कर्ज़ पर 10 से 15 प्रतिशत ब्याज के अलावा प्रोसेसिंग फीस व प्रीक्लोजर चार्जेज भी देने होते हैं. हालांकि पीपीएफ से कर्ज़ लेने की एक सीमा है. साथ ही एक वित्त साल में एक बार ही कर्ज़ लिया जा सकता है. नया कर्ज़ भी तभी लिया जा सकता है, जब पुराने कर्ज़ का भुगतान कर दिया गया हो.