Loan ट्रांसफर कराने के नियम RBI ने बदले, इन संस्‍थानों पर होगा लागू

Loan ट्रांसफर कराने के नियम RBI ने बदले, इन संस्‍थानों पर होगा लागू

Loan को एक बैंक से दूसरे में ट्रांसफर करने के नियम में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बदलाव कर दिया है। रिजर्व बैंक ने एक बैंक से दूसरे वित्तीय संस्थानों में कर्ज के स्थानांतरण को लेकर मास्टर दिशानिर्देश जारी किया। इसके तहत कर्ज देने से जुड़े संस्थानों को इस प्रकार के लेन-देन के लिये निदेशक मंडल की मंजूरी के साथ एक व्यापक नीति तैयारी करनी होगी।

आरबीआई ने कहा कि कर्ज देने वाले संस्थान विभिन्न कारणों से कर्ज स्थानांतरण का सहारा लेते हैं। इसमें नकदी प्रबंधन, उनके जोखिम या रणनीतिक बिक्री को पुनर्संतुलित करना शामिल है। साथ ही, कर्ज मामले में एक मजबूत द्वितीयक बाजार नकदी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त तरीके उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

रिजर्व बैंक के निर्देश के प्रावधान बैंकों, आवास वित्तय कंपनियों, नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक), राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी), भारत निर्यात-आयात बैंक (एक्जिम बैंक) समेत सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर लागू होंगे।


मास्टर निर्देश में विभिन्न श्रेणी के कर्ज को रखने की न्यूनतम अवधि का भी प्रावधान किया गया है। उस अवधि के बाद ही कर्ज एक बैंक से दूसरे बैंक में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि कर्ज देने वाले संस्थानों को इन दिशानिर्देशों के तहत कर्ज ट्रांसफर और अधिग्रहण के लिए बोर्ड से मंजूरी के साथ एक व्यापक नीति बनानी होगी।

जांच-परख, मूल्यांकन, जरूरी आईटी प्रणाली, भंडारण और आंकड़ा प्रबंधन, जोखिम प्रबंधन, निश्चित अवधि पर निदेशक मंडल स्तर पर निगरानी आदि से संबंधित न्यूनतम मात्रात्मक और गुणात्मक मानदंड निर्धारित करने की जरूरत होगी। भारतीय रिजर्व बैंक निर्देश (कर्ज स्थानांतरण), 2021 पर मसौदा दिशानिर्देश को पिछले साल जून में विभिन्न पक्षों की टिप्पणी के लिये जारी किया गया।

टिप्पणियों पर विचार करने के बाद इस पर अंतिम निर्देश शुक्रवार को जारी कर दिये गये। आरबीआई ने कहा कि निर्देश तत्काल प्रभाव से अमल में आ गये हैं। निर्देश में कर्ज के स्थानांतरण को लेकर प्रक्रिया की जानकारी दी गयी है।

आरबीआई ने मानक संपत्ति के प्रतिभूतिकरण पर भी निर्देश जारी किया ताकि विभिन्न प्रकार के जोखिम के साथ व्यापार योग्य प्रतिभूतियों में उन्हें फिर से शामिल करने (रिपैकेजिंग) की सुविधा हो सके।


Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla Inc (टेस्ला इंक) ने भारतीय मार्केट में एंट्री करने से पहले इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात करों को कम करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफिस से निवेदन किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया, टेस्ला ने कुछ भारतीय वाहन निर्माताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया. टेस्ला इस वर्ष हिंदुस्तान में आयातित कारों की बिक्री प्रारम्भ करना चाहती है. लेकिन उनका बोलना है कि हिंदुस्तान में कर दुनिया में सबसे अधिक हैं.


टेस्ला ने कर कटौती के लिए सबसे पहले जुलाई में निवेदन किया था. जिस पर देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई लोकल कंपनियों ने असहमति जताई थी. इनका बोलना है कि इस तरह के कदम से घरेलू मैन्युफेक्चरिंग में निवेश बाधित होगा. 

हिंदुस्तान में टेल्सा के नीति प्रमुख मनुज खुराना सहित कंपनी के ऑफिसरों ने पिछले महीने एक बंद दरवाजे की मीटिंग में कंपनी की मांगों को मोदी के ऑफिसरों के सामने रखा, और यह तर्क दिया कि कर बहुत अधिक हैं. इस चर्चा से परिचित चार सूत्रों ने यह बताया. 

तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.
एक सूत्र के अनुसार, मोदी के ऑफिस में मीटिंग के दौरान, टेस्ला ने बोला कि हिंदुस्तान में शुल्क संरचना देश में उसके कारोबार को "व्यवहार्य प्रस्ताव" नहीं बनाएगी.

हिंदुस्तान 40,000 US डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 60 फीसदी का आयात शुल्क और 40,000 US डॉलर से अधिक मूल्य वाले वाहनों पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है. विश्लेषकों ने बोला है कि इन दरों पर टेस्ला की कारें खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी और उनकी बिक्री को सीमित कर सकती हैं. 
तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.