वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैकों से बोली यह जरुरी बात

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैकों से बोली यह जरुरी बात

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैकों से बोला है कि वह सरलता से लोन बांटे. उन्होंने एचोसैम के सम्मेलन में बोला कि नकदी की कठिनाई की सरकार ने दूर किया व अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए कई तरह के कोशिश किए गए हैं. उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिया कि सरकार बैंकों के कामकाज में किसी तरह का हस्तेक्षप नहीं करती है व वह कारोबारी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं.

वित्त मंत्री ने यह भी बोला कि सूक्ष्म, छोटे एवं मझौले उद्यमियों (एमएसएमई)के बैंक खाते में किसी प्रकार की कमी है या खाते से जुड़ी किसी भी प्रकार की कठिनाई है तो एमएसएमई 7 जनवरी तक इसे अच्छा करा सकते हैं. सरकार एमएसएमई के खातों को दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान चला रही है. इस दौरान खाते संबंधी अपनी समस्याओं के लिए एमएसएमई किसी भी सरकारी बैंक में जा सकते हैं.

सीतारमण ने औद्योगिक जगत व उद्यमियों से खुद को शक से बाहर करने का आह्वान किया. उन्होंने बोला कि वे इन बातों पर विचार करना या सोचना छोड़ दे कि क्या वे ऐसा नहीं कर सकते, हिंदुस्तान में ऐसा नहीं हो सकता, इस प्रकार की निगेटिव बातों को सोचना छोड़ उन्हें आगे आना पड़ेगा. उन्होंने उद्यमियों से बोला कि आप हिंदुस्तान में भरोसा रखे.

ऊर्जा संयंत्र पर जोर हो बुनियादी संरचना क्षेत्र ने सरकार से कंपनियों को व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए नवीकरणीय ऊर्जासंयंत्र लगाने की नीति लाने, सब्सिडी व पारेषण शुल्क से छूट देने की मांग की.
 
छोटी बचत को तर्कसंगत बनाने की जरूरत

अर्थशास्त्री अर्थशास्त्रियों ने वित्त मंत्री के साथ बजट पूर्व मीटिंग में लघु बचत दरों को तर्कसंगत बनाने व प्रत्यक्ष कर संहिता को अमल में लाने सहित कई सुझाव दिए हैं. साथ ही नीतियों से जुड़े मुद्दों के त्वरित निवारण की भी सलाह दी है.
 
एमएसएमई एनपीए में नहीं होंगी 

वित्त मंत्री ने बोला कि आर्थिक तंगी से गुजर रही एमएसएमई इकाइयों को एनपीए (गैर निष्पादित संपत्ति) की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. उन्होंने बोला कि हम एमएसएमई को लाभ पहुंचाने के लिए उसकी परिभाषा को बदलाना चाहते हैं.