Maruti Suzuki के कस्टमर के लिए खुशखबरी, कंपनी खोलेगी 300 नयी मोबाइल सर्विस वैन

Maruti Suzuki के कस्टमर के लिए खुशखबरी, कंपनी खोलेगी 300 नयी मोबाइल सर्विस वैन

नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (Maruti Suzuki India) चालू वित्त साल के अंत तक अपनी मोबाइल सर्विस वैन की संख्या बढ़ाकर 300 करेगी कंपनी ने अपनी सर्विस ऑन व्हील्स (Service on Wheels) पहल के अनुसार इन वैनों की संख्या बढ़ाएगी कंपनी का बोलना है कि इस पहल का मकसद कोविड महामारी के दौरान मारुति कार मालिकों की सहायता करना है

कंपनी के एक सीनियर ऑफिसर ने PTI से बात करते हुए बोला कि मारुति सुजुकी सर्विस ऑन व्हील्स और कंपनी की वर्कशॉप द्वारा उठाए गए कदमों से वाहन सेवा कारोबार दूसरी तिमाही में 2019-20 की समान अवधि की तुलना में बेहतर प्रदर्शन रहा है

MSIL के पार्थो बनर्जी (Partho Banerjee) ने बोला कि मारुति सर्विस Covid-19 महामारी के बाद बहुत ज्यादा तेजी से उबरी है हमारी सर्विस ऑन व्हील्स को बेहतर रही है ग्राहक आज भी इसे अहमियत दे रहे हैं उन्होंने आगे बोला कि अभी तक कंपनी ग्राहकों के दरवाजे पर फ्री में सर्विस उपलब्ध करा रही थी क्योंकि भुगतान लेने पर वाहन को उठाकर सफाई करने की आवश्यकता होती उसके बाद कंपनी ने इस मुद्दे को सुपर कैरी (Super Carry) पर मोबाइल सर्विस के जरिए हल किया

बनर्जी ने कहा, एक वर्ष से कम समय में अब हमारे पास 250 सर्विस ऑन व्हील्स वैन हो गई हैं जो कि एक वर्ष में बड़ा आकंड़ा है उन्होंने बोला कि हम इसे बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ा रहे हैं क्योंकि डीलरों के साथ-साथ अब ग्राहक भी अपने घर के दरवाजे पर सर्विसिंग को अहमियत दे रहे हैं बनर्जी ने दावा किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग इस सर्विस को बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं ग्राहक इतने खुश हैं कि अब उन्हें वर्कशॉप में नहीं जाना पड़ता है


Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla Inc (टेस्ला इंक) ने भारतीय मार्केट में एंट्री करने से पहले इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात करों को कम करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफिस से निवेदन किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया, टेस्ला ने कुछ भारतीय वाहन निर्माताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया. टेस्ला इस वर्ष हिंदुस्तान में आयातित कारों की बिक्री प्रारम्भ करना चाहती है. लेकिन उनका बोलना है कि हिंदुस्तान में कर दुनिया में सबसे अधिक हैं.


टेस्ला ने कर कटौती के लिए सबसे पहले जुलाई में निवेदन किया था. जिस पर देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई लोकल कंपनियों ने असहमति जताई थी. इनका बोलना है कि इस तरह के कदम से घरेलू मैन्युफेक्चरिंग में निवेश बाधित होगा. 

हिंदुस्तान में टेल्सा के नीति प्रमुख मनुज खुराना सहित कंपनी के ऑफिसरों ने पिछले महीने एक बंद दरवाजे की मीटिंग में कंपनी की मांगों को मोदी के ऑफिसरों के सामने रखा, और यह तर्क दिया कि कर बहुत अधिक हैं. इस चर्चा से परिचित चार सूत्रों ने यह बताया. 

तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.
एक सूत्र के अनुसार, मोदी के ऑफिस में मीटिंग के दौरान, टेस्ला ने बोला कि हिंदुस्तान में शुल्क संरचना देश में उसके कारोबार को "व्यवहार्य प्रस्ताव" नहीं बनाएगी.

हिंदुस्तान 40,000 US डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 60 फीसदी का आयात शुल्क और 40,000 US डॉलर से अधिक मूल्य वाले वाहनों पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है. विश्लेषकों ने बोला है कि इन दरों पर टेस्ला की कारें खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी और उनकी बिक्री को सीमित कर सकती हैं. 
तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.