बिहार

पटना हाई कोर्ट से सिपाही को राहत: सेवा समाप्त करने के आदेश पर लगाई रोक

पटना उच्च न्यायालय ने सिपाही नरेंद्र कुमार को बड़ी राहत मिली है. सेवा खत्म करने के आदेश पर न्यायालय ने रोक लगा दी है. साथ ही सस्‍पेंड रहने की अवधि के दौरान पूरा भुगतान करने का आदेश दिया है. न्यायालय ने बिहार के डीजीपी को आदेशित किया है कि पीड़ित सिपाही को तीन

भ्रष्टाचार के इल्जाम में हुई थी कार्रवाई

मामला 2021 का है, जब लखीसराय के तत्कालीन एसपी ने सिपाही को करप्शन के इल्जाम में सस्पेंड कर दिया था. जिसके बाद एसपी के आवेदन पर तत्कालीन डीजीपी ने बर्खास्त कर दिया था. जिसके बाद मुद्दा न्यायालय में पहुंचा था.

जानिए न्यायालय ने अपने आदेश में क्या कहा?

कोर्ट ने अपने आदेश में बोला कि गलत ढंग से सेवा समापन के मामलों में, सेवा की निरंतरता के साथ बहाली और 100% बकाया वेतन सामान्य नियम है. विचार करने योग्य एक अन्य कारक यह है कि यदि सिपाही ने वैधानिक प्रावधानों या प्राकृतिक इन्साफ के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है तो संबंधित न्यायालय को पूर्ण बकाया वेतन का भुगतान करने का निर्देश देना पूरी तरह से मुनासिब होगा.

याचिकाकर्ता को प्रताड़ित किया गया है- कोर्ट

कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादियों द्वारा याचिकाकर्ता के साथ किए गए घोर अन्याय का मुद्दा है. रिकॉर्ड पर उपस्थित सामग्री पर्याप्त रूप से दर्शाती है कि प्राकृतिक इन्साफ के सिद्धांतों को दरकिनार कर दिया गया है. याचिकाकर्ता को प्रताड़ित किया गया है. न्यायालय का मानना है कि जांच रिपोर्ट दिनांक 2 मई 2022 को खारिज करने के परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त करने का दंड का आदेश 10 मई 2022 को जारी किया गया.

बकाया भुगतान कर सूचित करने का आदेश

इसलिए न्यायालय ने डीजीपी को आदेश दिया है कि सिपाही की सेवा की निरंतरता के साथ और आज से तीन महीने की अवधि के भीतर सभी लाभों के साथ उन्हें बकाया वेतन का भुगतान कर, हमें सूचित करें.

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