बिहार

इस ‘दमादुआ सब्जी’ की खेती से बन जाएंगे लखपति

 जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है, किसान खेती के ढंग में काफी परिवर्तन ला रहा है अब किसान अपने खेत को खाली नहीं छोड़ते हैं इससे उनके आर्थिक जीवन में काफी सुधार आया है ऐसे ही पूर्णिया के किसान रणधीर कुमार सिंह हैं, जो सीजनली सब्जी की खेती करते हैं दमदुआ सब्जी यानी झींगा की खेती कर वो कम लागत में बंपर फायदा कमा रहे हैं हर सीजन में भिन्न-भिन्न सब्जी लगाकर सीजनली 3 लाख से अधिक का फायदा कमाते हैं

शुरुआत में 50 रुपए किलो गया दाम
Local 18 से बात करते हुए पूर्णिया रानीपतरा आगाटोला के किसान रणधीर कुमार सिंह बताते हैं कि वह पिछले 30 सालों से खेती करते आ रहे हैं तकरीबन डेढ़ एकड़ खेत में झींगा यानी नेनुआ की खेती की है इस नेनुआ की पहली तुड़ाई प्रारम्भ हो गई है पहली तुड़ाई में 50 रुपए किलो मूल्य मिला और अब दूसरी तुड़ाई चल रही है ऐसे में वह कहते हैं कि उनके खेत में नेनुआ की खेती देखकर उनका भी मन काफी खुश हो गया किसान कहते हैं कि वह अपने खेत में ऑर्गेनिक ढंग से फसल या सब्जी को उगाते हैं

दामाद की तरह की जाती है नेनुआ की खेती
किसान रणधीर कुमार सिंह मीडिया को बताते हैं कि नेनुआ की खेती करना तो ठीक है, लेकिन इसके फलन को तोड़कर बाजार में मुनासिब मूल्य पर बेच लेना ही थोड़ा कठिन का काम होता है इस नेनुआ की खेती को दमादुआ खेती भी कहते हैं इसका कारण बताते हुए बोला कि नेनुआ खेती को दमादुआ खेती इसलिए बोला जाता है, क्योंकि जिस तरह दामाद के ससुराल आने पर पूरी तरह मान सम्मान और इज्जत सत्कार किया जाता है, उन पर एक खरोंच तक नहीं आनी चाहिए ऐसे ही नेनुआ की खेती भी की जाती है इसको भी दामाद की तरह ही देख-रेख और स्क्रैच से बचाने पड़ते हैं हालांकि इन फलन पर यदि छोटी-सी स्क्रैच या दाग लग जाए, तो बाजार में मूल्य कुछ भी नहीं मिलता है इस कारण इस फलन को विशेष कर ध्यान से तोड़ा जाता है

खेती में लागत 80 हजार, फायदा 3 लाख से ज्यादा
उन्होंने अपने डेढ़ एकड़ खेत में नेनुआ की खेती की है इसमें तकरीबन 80 हजार रुपए के आसपास लागत आई है इस खेत में पहले गोभी की फसल उगाई और अब नेनुआ यानी झींगा अंतरवर्ती खेती की है इससे फलन काफी अच्छा हो रहा है अभी बाजार में 30 से 40 रुपए प्रति किलो नेनुआ बिकता है आने वाले कुछ समय में भी यही स्थिति बनी रहेगी ऐसे में उन्होंने बोला कि उन्हें सीजनली 3 से 4 लाख तक का फायदा हो जाता है इन्ही लाभ के पैसों से वो बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए भी लगातार प्रयासरत रहते हैं

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